देहरादून में हरीश रावत ने दर्ज कराई एफआईआर, पाकिस्तानी जासूस तथा देशद्रोही बता बदनाम करने की कोशिश एक खतरनाक कदम
25 दिसंबर को भाजपा कार्यालय में ‘भंडाफोड़’ की चेतावनी
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के कथित आपत्तिजनक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में नेहरू कॉलोनी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मंगलवार को करीब चार घंटे के इंतजार के बाद पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया। पूर्व सीएम ने बताया कि देहरादून के एसएसपी अजय सिंह से भी उन्होंने दूरभाष पर वार्ता कर अपनी शिकायत बतायी है। उन्होंने उम्मीद जतायी की आरोपियों के खिलाफ साईबर क्राईम एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही की जायेगी। इस घटना को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखा जा रहा है। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग कर वीडियो प्रसारित किया गया और उन्हें पाकिस्तानी जासूस तथा देशद्रोही बताने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि शिकायत पत्र में आरोपियों की पहचान बताने के बावजूद एफआईआर में उन्हें अज्ञात दर्शाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक साधारण शिकायत दर्ज करने में चार घंटे का समय लगना चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ इस तरह की सामग्री फैलाकर न केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी खतरे में डाला गया है।हरीश रावत ने बताया कि वह साइबर क्राइम थाने और साइबर क्राइम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी मिले हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि इस तरह के आरोपों से लोगों में उनके प्रति नफरत पैदा हो सकती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।पूर्व सीएम ने ऐलान किया कि वह 25 दिसंबर को दोपहर 1 बजे भाजपा कार्यालय जाकर सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों का जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा कि वह भाजपा से 2017 और 2022 के चुनावों से जुड़े आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने को कहेंगे। हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ की गई बदनाम करने की कोशिश एक खतरनाक कदम है और इसके खिलाफ वह खुलकर सामने आएंगे।


