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गैस एजेंसियों ने फेरा पानी: निर्धारित 2650 कमर्शियल सिलेंडर के स्थान पर केवल 879 सिलेंडर किए डिलीवर

देहरादून । राज्य में गैस सिलेंडर को लेकर फैले पैनिक को कम करने एवं प्रत्येक उपभोक्ता तक को गैस सिलेंडर के आपूर्ति सुनिश्चित करने की गरज से राज्य सरकार द्वारा लाई गई एसओपी का, उत्तराखंड की विभिन्न गैस एजेंसियां पहले ही दिन पूर्ण पालन नहीं सुनिश्चित कर सकीं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में इस समय शीतकालीन यात्रा चल रही है और अगले ही महीने चारधाम यात्रा भी आरंभ होने जा रही है। ऐसे में आगामी चारधाम यात्रा के दौरान पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हितधारकों को व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति न होने पर पर्यटन व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका गहराती जा रही थी , साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कमर्शियल गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होने के चलते कमर्शियल गैस कनेक्शन धारकों को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा था और उनके व्यवसाय पर संकट मंडराने लगा था। उपरोक्त तमाम दिक्कतों का उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने समय रहते संज्ञान लिया और सरकार के निर्देश पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव आनंद स्वरूप द्वारा 16 मार्च को कमर्शियल गैस सिलिंडर की डिलीवरी के लिए बाकायदा एक एसओपी जारी की गई थी । एसओपी के अनुसार प्रदेश के सभी व्यावसायिक गैस सिलिंडर कनेक्शन धारकों को रोजाना 2650 सिलिंडर उपलब्ध कराए जाने थे तथा सिलिंडर वितरण के लिए, राज्य की 03 आपूर्तिकर्ता तेल एवं गैस कंपनियों यानि आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को उनकी वर्तमान बाजार में हिस्सेदारी के अनुसार दायित्व निर्धारित किया जाना था, साथ ही जारी एसओपी में यह भी उपबंध किया गया था कि यह तीनों आपूर्तिकर्ता कंपनियां, कमर्शियल गैस की आपूर्ति करेंगी और इसकी जानकारी संबंधित जिलाधिकारी को भी देंगी, लेकिन एसओपी जारी होने के अगले दिन यानी 17 मार्च को ही विभिन्न तीनों गैस एजेसियों ने राज्य सरकार की अब तक की कोशिशें पर पानी फेर दिया और 17 मार्च को राज्य भर में केवल 879 कमर्शियल गैस सिलिंडर की ही डिलीवरी हो पाई, जबकि 16 मार्च तक गैस एजेंसियों के पास 11,490 कमर्शियल गैस सिलिंडर का स्टॉक उपलब्ध था। दरअसल, सरकार का पहला प्रयास घरेलू गैस सिलिंडर की पूर्ति का पूरा करना था। इसीलिए गैस संकट आने के बाद सरकार ने सबसे पहले कमर्शियल गैस सिलिंडर की डिलीवरी बंद कर दी गई थी और शुरू में सिर्फ हॉस्पिटलों, शैक्षिक संस्थानों जैसे हॉस्टल और सरकारी दफ्तरों या फिर इमरजेंसी जैसी जंगहों पर ही कमर्शियल गैस सिलिंडर की डिलीवरी की जा रही थी। अन्य जगहों पर कमर्शियल गैस सिलिंडर की डिलीवरी बंद होने से होटल, रेस्टोरेंट समेत इस तरह के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को काफी दिक्कत हो रही थी, जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदेश में कुछ महत्वपूर्ण सेक्टर चिन्हित किए थे, जहां पर रोजाना 20 फीसदी कमर्शियल गैस की डिलीवरी करने को कहा गया था। मगर उत्तराखंड में गैस सिलेंडर की आपूर्ति करने वाली गैस एजेंसियां पहले ही दिन निर्धारित आंकड़ा पूरा नहीं कर पाईं ।

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