वन ग्रामों को प्राथमिकता से बनाया जायेगा राजस्व ग्रामः बलूनी
रामनगर(उद संवाददाता)। पौड़ी लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनिल बलूनी का रामनगर में विधायक दीवान सिंह बिष्ट एवं भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। सांसद ने मीडिया से रूबरू होते हुए वन ग्रामों, खत्तों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रामनगर और आसपास के वन ग्रामों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को लेकर उन्होंने भारत सरकार और उत्तराखंड के मुख्य सचिव से पहले ही बातचीत की है। इसी क्रम में उन्होंने जिलाधिकारी से भी चर्चा की और उन्हें निर्देश दिए कि जल्द से जल्द वन ग्रामों की सूची तैयार की जाए। इस सूची में यह स्पष्ट किया जाएगा कि कौन-कौन से ग्राम राजस्व ग्राम में परिवर्तित किए जा सकते हैं और किन ग्रामों में कानूनी या अन्य अड़चनें हैं। सांसद ने यह भी कहा कि खत्तों में रहने वाले लोगों को मूलभूत नागरिक सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। इन क्षेत्रें में लोग लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और बहुत जल्द ठोस कार्रवाई शुरू हो जाएगी। जो वन ग्राम राजस्व ग्राम घोषित किए जा सकते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द ही राजस्व ग्राम बनाया जाएगा। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को लेकर सांसद ने कहा कि यह विश्व प्रसिद्ध पार्क है और पर्यटन गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वन एवं पर्यावरण से जुड़े दायित्वों में रहते हुए भी उन्होंने इस क्षेत्र में कार्य किया था और अब भी पर्यटन को बढ़ावा देने तथा जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद ने बताया कि हाल ही में भारत सरकार के वन विभाग की कंसलटेटिव कमेटी की बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव पर वैज्ञानिक अध्ययन और रिसर्च की आवश्यकता है। इस हेतु केंद्र सरकार से संसाधन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव ने उत्तराखंड को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। अंत में सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने हमेशा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में बलिदान दिया है, लेकिन इसकी कीमत आम जनता को नहीं चुकानी पड़े। केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ राज्य का सहयोग करेगी और वन ग्रामों तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से हल किया जाएगा।
