धर्मनगरी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब : मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी
हरिद्वार (उद संवाददाता)। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही हर की पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, दिन भर जारी रहा। कड़ाके की ठंड और शीत लहर के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई और लाखों की संख्या में भक्तों ने गंगा में पावन डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। मौनी अमावस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि माघ माह में पड़ने वाली इस अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रें के अनुसार, इस दिन मौन रहकर गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। माना जाता है कि आज के दिन सभी देवी- देवता और अदृश्य ऋषि-मुनि भी धरती पर पवित्र नदियों में स्नान के लिए पधारते हैं। आज के दिन गंगा स्नान के पश्चात तिल, गुड़, अन्न और गरम वस्त्रें के दान का विधान है, जिससे साधक को सहस्त्र वर्षों तक पुण्यफल की प्राप्ति होती है। स्नान पर्व को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक- चौबंद इंतजाम किए गए थे। मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटकर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। सुबह के समय अत्यधिक ठंड के कारण भीड़ कुछ कम रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा और धूप खिली, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होता गया। दिन भर हर की पैड़ी और आसपास के घाट ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों से गूंजते रहे। अमावस्या होने के कारण हरिद्वार के प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और पूजन करने से पूर्वजों को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। यही कारण रहा कि देश के कोने-कोने से आए लोगों ने मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य कर पितृ दोष से मुक्ति की कामना की। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते स्नान पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
