February 18, 2026

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‘चार दिन’ भी बरकरार नहीं रह पाई ‘त्रिशूल चौक की चकाचौंध”

उद्घाटन के दो दिन बाद ही अंधेरे में डूबा त्रिशूल चौक,इंदिरा चौक में स्थापित त्रिशूल के सामने लगाई गई गोल्डन लाइट बंद होने से गायब हुई त्रिशूल की स्वर्णिम आभा
रुद्रपुर। सरकारी कार्य प्रणाली की भर्रेशाही का जीता जागता नमूना देखना हो तो कोई व्यक्ति शहर के त्रिशूल चौक ;पहले का इंदिरा चौकद्ध में जा सकता है,जहां बीती चौदह तारीख को बड़े ही धूम धड़ाके के साथ स्थापित किया गया विशालकाय त्रिशूल अब पूरी तरह अंधकार में डूबा हुआ है और स्थापना के समय त्रिशूल से निकलने वाली स्वर्णिम आभा के फिलहाल कहीं दर्शन नहीं हो रहे हैं। लिहाजा, रुद्रपुर शहर में सनातनी वैभव को दर्शित करने के उद्देश्य से बनाया गया भाव त्रिशूल चौक उद्घाटन के तीन रोज बाद ही चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करने लगा है । याद दिलाना होगा कि अभी चौदह फरवरी को ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट, रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा तथा रुद्रपुर मेयर विकास शर्मा एवं भारतीय जनता पार्टी के तमाम छोटे बड़े नेताओं की मौजूदगी में, अब से पहले के इंदिरा चौक और वर्तमान के त्रिशूल चौक में स्थापित विशाल त्रिशूल का एक भव्य कार्यक्रम में उद्घाटन किया था। उद्घाटन के बाद त्रिशूल चौक की भव्यता देखते ही बनती थी, विशेष कर रात के अंधेरे में सुनहरी रोशनी से नहाए स्वर्णिम रंग के त्रिशूल से निकलने वाली स्वर्णिम आभा देखने वाले को पूरी तरह अभिभूत कर देती थी ,लेकिन सरकारी उदासीनता का नमूना तो देखिए कि उद्घाटन स्थल से मुख्यमंत्री धामी की कार के पहियों के निशान पूरी तरह मिटने से पहले ही, उन सभी सरकारी अधिकारियों- कर्मचारियों, जिन्होंने त्रिशूल चौक को भव्यता प्रदान करने में दिन-रात पसीना बहाया था, ने त्रिशूल चौक से आंखें फेर ली। इसके अलावा त्रिशूल चौक के उद्घाटन के बाद त्रिशूल के समक्ष खड़े होकर सेल्फी लेने वाले लोगों हुजूम भी अब मौके से पूरी तरह नदारद है। शहर के सेल्फी प्रेमियों के उत्साह एवं जुनून का गिलास में डाली गई बियर के झाग की मानिंद रोज- दो- रोज में ही बैठ जाना हालांकि अचरज में नहीं डालता, क्योंकि सेल्फी प्रेमियों के लिए इस समय शहर के गांधी पार्क में भी सेल्फी लेने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं, मगर लाखों रुपए से निर्मित किसी महत्वपूर्ण संरचना की, उद्घाटन के तीन रोज बाद ही प्रशासन के स्तर पर ऐसी उपेक्षा आश्चर्य में डालने के साथ-साथ तनिक पीड़ा देने वाली भी है। बताने की जरूरत नहीं कि नवनिर्मित त्रिशूल चौक की भव्यता रात में ही पूरी तरह नजर आती है और इसमें त्रिशूल चौक के चारों तरफ लगाई गई फैंसी लाइटों तथा त्रिशूल के समक्ष लगाई गई गोल्डन लाइटों का विशेष योगदान रहता है। इसलिए त्रिशूल चौक पर ऐसे इंतजाम किए जाने आवश्यक हैं। जिससे बिजली गुल होने अथवा आंधी- अंधड़ की स्थिति में भी त्रिशूल चौक की बिजली बदस्तूर जलती रहे। चौबीस घंटे ना सही, पर शाम ढलने के बाद तो त्रिशूल चौक का लाइट सिस्टम चाक चौबंद तरीके से काम करना ही चाहिए।

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