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रामनगर पुछड़ी बस्ती में वन भूमि से हटाया अतिक्रमण, अवैध मदरसे और मस्जिद भी हटाये

सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुल 52 अवैध स्ट्रक्चर ध्वस्त
रामनगर। पालिका क्षेत्र से सटी कोसी नदी किनारे रिजर्व फॉरेस्ट की सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान तड़के भारी लाव लस्कर के साथ शुरू किया गया। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देश पर कोसी नदी किनारे उक्त अतिक्रमण को हटाने के लिए पिछले कई महीनों से कवायद की जा रही थी। जानकारी के मुताबिक वन विभाग की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके यहां मजार मस्जिद मदरसे तक बना डाले। इस क्षेत्र को पुछड़ी बस्ती बोला जाता है जब यहां सर्वे के लिए प्रशासन की टीम गई तो वो भी यहां के हालात देख कर हैरान हो गई। वन सरकारी भूमि के सौदे कैसे यहां भू माफिया कर रहे हैं,इस बात की जांच के लिए शासन ने एसआईटी गठित की जिसकी रिपोर्ट के बाद यहां से अतिक्रमण हटाने की कारवाई शुरू की गयी। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की इस भूमि पर लंबे समय से लोग अवैध खेती कर रहे थे। वन विभाग ने पहले भी इन कब्जों को चिह्नित किया था, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। कुछ वर्ष पहले तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने रामनगर नगर पालिका को कूड़ा निस्तारण (ट्रेंचिंग ग्राउंड) के लिए लगभग एक हेक्टेयर भूमि दी थी। इसके बदले नगर पालिका ने वन विभाग को करीब एक करोड़ रुपये भी प्रदान किए थे। लेकिन यह भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाई थी। स्थिति को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल, वन विभाग की एसडीओ किरण शाह, राजस्व विभाग, पुलिस और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पहले व्यापक सर्वे किया। ड्रोन कैमरों के जरिए अवैध कब्जों की पहचान की गई। रविवार को प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुल 52 अवैध स्ट्रक्चर ध्वस्त कर दिये गये। कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के रोते-बिलखते हालात ने माहौल को भावुक कर दिया, लेकिन पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई। कार्यवाही की कमान संभाल रहे एडीएम विवेक राय ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित लोगों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। सुनवाई के बाद ही निष्कासन का आदेश लागू किया गया। एडीएम ने बताया कि अभियान को सुव्यवस्थित करने के लिए पूरे क्षेत्र को नौ सेक्टरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सेक्टर में सेक्टर मजिस्ट्रेट और कार्यपालक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई, जबकि संपूर्ण सुरक्षा प्रबंधन के लिए एक सुपर जोन बनाया गया। एडीएम स्तर के अधिकारी को पूरे अभियान की लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भारी पुलिस बल की तैनाती के चलते कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनी। कई प्रभावित परिवारों ने कहा कि उन्होंने यह जमीन 2 से 3 लाख रुपये में एक डॉक्टर ताहिर और एक स्थानीय पत्रकार से खरीदी थी। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने भी कथित तौर पर पैसे लेकर उन्हें आश्वासन दिया था। इन आरोपों पर एडीएम विवेक राय ने कहा कि अवैध रूप से जमीन बेचने वालों की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी। तराई पश्चिमी के डीएफओ प्रकाश आर्य ने जानकारी दी कि अपर कोसी ब्लॉक क्षेत्र में कुल 170 परिवारों को बेदखली नोटिस दिए गए थे। इनमें से कई परिवार पहले ही स्वतः कब्जा छोड़ चुके हैं। कुछ मामलों पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आज केवल उन्हीं 52 स्ट्रक्चरों को हटाया गया, जो पूर्णतः अवैध और निष्कासन आदेश के दायरे में थे। पूरे अभियान की ड्रोन कैमरों और वीडियोग्राफी के माध्यम से निगरानी की गई, ताकि किसी भी स्थिति का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। एसएसपी मंजूनाथ टी सी ने बताया कि रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर बाहर से आए लोगों ने अवैध बसावट कर ली थी जिन्हें वन विभाग हटा रहा है। अभियान में कोई बाधा न डाले इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा बंदोबस्त किए हुए है।

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