February 11, 2026

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धामी कैबिनेट ने लिये छह अहम फैसले : ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020’ को वापस लेने का निर्णय

देहरादून (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने श्रम, गृह, वन और कृषि विभाग से जुड़े कई संवेदनशील और विकासोन्मुखी निर्णयों को मंजूरी दी है। बैठक के सबसे बड़े फैसले के तहत श्रम विभाग से संबंधित ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020’ को वापस लेने का निर्णय लिया गया है, जिससे अब प्रदेश के श्रमिकों को केंद्रीय कानून के तहत बोनस का लाभ मिल सकेगा। मंत्रिमंडल ने कोविड काल के दौरान लाए गए ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020’ को वापस लेने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। तत्कालीन परिस्थितियों में उद्योगों को केवल सरप्लस (अतिरिक्त लाभ) होने पर ही बोनस देने का प्रावधान किया गया था। चूंकि यह संशोधन राष्ट्रपति भवन भेजा गया था लेकिन वहां से लंबित रहा, इसलिए सरकार ने अब इसे वापस लेने का फैसला किया है। इसके परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में 1965 का मूल केंद्रीय कानून ही प्रभावी रहेगा, जिससे उद्योगों की लाभ की स्थिति की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और मानक नियमों के तहत सभी पात्र कर्मचारियों को बोनस का लाभ मिलना सुनिश्चित होगा। प्रदेश के ईएसआई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने और चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने ‘उत्तराखंड एम्पलाई स्टेट सर्विस स्कीम 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कुल 94 नए पदों का सृजन किया गया है। खास बात यह है कि अब तक मेडिकल ऑफिसर के पदों पर भर्ती तो होती थी, लेकिन पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं थे। नई नियमावली के तहत मेडिकल ऑफिसर के 76 पदों के साथ-साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के 11 पद, लेवल-12 के 6 पद और एडिशनल डायरेक्टर लेवल-13 का एक पद सृजित किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशासनिक दक्षता आएगी। नशा मुक्त उत्तराखंड के संकल्प को मजबूती देते हुए कैबिनेट ने वर्ष 2022 में गठित ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ के लिए अलग से 22 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी है। ये सभी पद मुख्यालय स्तर के होंगे, जिसमें पुलिस उपाधीक्षक का एक पद भी शामिल है। इससे नशे के कारोबारियों के खिलाफ राज्य स्तर पर फोर्स अधिक सशक्त होकर कार्य कर सकेगी। साथ ही, कारागार एक्ट 2024 में ‘हैब्युचल ऑफेंडर’ (आदतन अपराधी) की परिभाषा में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार के मानकों को अपनाया गया है, जिससे बार-बार अपराध करने वालों पर पूर्व के सख्त कानूनों के तहत शिकंजा कसा जा सकेगा। वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों के लिए भी कैबिनेट ने बड़ा तोहफा दिया है। विभाग के कुल 893 दैनिक श्रमिकों में से 314 को पहले ही न्यूनतम वेतन मिल रहा था, अब शेष 579 श्रमिकों को भी 18 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दे दी गई है। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग के तहत ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना’ की अवधि को देखते हुए प्रदेश में संचालित ‘मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना’ को भी वर्ष 2025-26 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि स्थानीय उद्यमियों को सरकारी सहायता निरंतर मिलती रहे।

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