पुनर्गठित मंत्रिमंडल की पहली कैबिनेट ने 16 प्रस्तावों पर लगाई मुहर : अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए स्वरोजगार में आरक्षण का निर्णय
प्रधानमंत्री के शुभकामना संदेश के साथ शुरू हुई बैठक
देहरादून (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पुनर्गठित मंत्रिमंडल की पहली महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को सचिवालय में संपन्न हुई, जिसमें प्रदेश के विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट विस्तार के बाद आयोजित इस पहली बैठक का शुभारंभ नए मंत्रियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। बैठक की गरिमा तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के सफल चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए विशेष शुभकामना संदेश को साझा किया। मुख्य सचिव द्वारा पढ़े गए इस संदेश में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के विकास मॉडल की सराहना की है, जिससे पूरी कैबिनेट में उत्साह का संचार देखा गया। इस बैठक में कुल 16 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें सबसे प्रमुख निर्णय प्रदेश के युवाओं और पूर्व सैनिकों के हितों से जुड़ा है। सरकार ने ‘उत्तराखंड वीर उद्यमी योजना’ और श्मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनाश् के स्वरूप में बड़ा बदलाव करते हुए अब कुल लक्ष्य का दस प्रतिशत हिस्सा पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिया है। इतना ही नहीं, देश की सेवा कर लौटे इन युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया है, जिससे राज्य में उद्यमशीलता को नया बल मिलेगा। इसी कड़ी में युवाओं को बड़ी राहत देते हुए पुलिस, पीएसी और अग्निशमन विभाग में सिपाही व उपनिरीक्षक पदों पर भर्ती के लिए आयु सीमा में हुए बदलावों के बाद दोबारा मौका देने हेतु नई नियमावली को स्वीकृति प्रदान की गई है। कर्मचारी कल्याण और बुनियादी ढांचे को लेकर भी कैबिनेट ने दूरगामी निर्णय लिए हैं। न्याय विभाग के कर्मचारियों के लिए अब दस लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन नाममात्र की ब्याज दर पर उपलब्ध होगा, जिससे उनके आर्थिक हितों की रक्षा हो सकेगी। वहीं वन विभाग में मुख्य प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दिया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी आए। ऊर्जा विभाग के तहत बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी का लाभ अब 31 मार्च 2025 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, लोक निर्माण विभाग में एक करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंसी को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीक में सुधार होगा। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के माध्यम से राज्य में 2-2 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को आर्थिक लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से तय किया गया है कि गेहूं और धान की खरीद पर मंडी शुल्क का उतना ही भार राज्य सरकार वहन करेगी जितना केंद्र सरकार द्वारा दिया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में एडेड स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय उप-समिति के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, देश में लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाने और नियोजन विभाग के अंतर्गत श्सेतु आयोगश् के संगठनात्मक ढांचे को भी अंतिम रूप दिया गया है। इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार का ध्यान स्वरोजगार, पारदर्शी भर्ती और किसान कल्याण पर केंद्रित है।
