आंधी- तूफान से तबाही,किशोर की मौत,मां गंभीर
वन विभाग की लापरवाही और फायर ब्रिगेड कर्मियों की अभद्रता पर ग्रामीणों का हंगामा
रामनगर (उद संवाददाता)। रविवार देर रात आए भीषण आंधी- तूफान ने रामनगर और आसपास के क्षेत्रें में जमकर तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा के बीच ग्राम रिंगौड़ा में एक हृदयविदारक घटना घटी, जहां विशालकाय पेड़ की चपेट में आने से 11 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों पर अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार, रविवार रात आए तूफान के दौरान ग्राम रिंगौड़ा निवासी प्रकाश उपाध्याय के घर पर एक विशालकाय हल्दू का पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गया। पेड़ की चपेट में आने से प्रकाश उपाध्याय का 11 वर्षीय पुत्र कार्तिक उपाध्याय दब गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, पास में मौजूद उसकी मां भी पेड़ की टहनियों की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया। किशोर की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ भारी रोष प्रकट करते हुए कहा कि विभाग की उदासीनता के कारण एक मासूम की जान चली गई। ग्रामीणों का दावा है कि जिस पेड़ से यह हादसा हुआ, उसे काटने और उसकी लोपिंग (छंटान) करने के लिए वर्ष 2012 से लगातार ििलखत शिकायतें दी जा रही थीं। बावजूद इसके, वन विभाग ने शिकायतों को अनसुना कर दिया। ग्रामीणों ने चेताया कि गांव में अभी भी कई ऐसे खतरनाक पेड़ खड़े हैं, जिनसे भविष्य में बड़ी अनहोनी हो सकती है। हादसे के बाद जब ग्रामीण मदद के लिए रामनगर स्थित फायर ब्रिगेड कार्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद कर्मचारियों के व्यवहार ने आग में घी डालने का काम किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारियों ने संसाधन न होने का बहाना बनाया और सूचना देने गए लोगों के साथ अभद्रता व धक्का-मुक्की की। इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। आंधी-तूफान से पूरे नगर क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और गिरे हुए पेड़ों के कारण वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। राजस्व विभाग की टीम नुकसान के आकलन के लिए क्षेत्र में रवाना कर दी गई है। वहीं, रिंगौड़ा गांव में हुई मौत की सूचना पर प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रें में कल देर रात आए भीषण आंधी-तूफान ने जमकर तबाही मचाई, जिससे क्षेत्र में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। प्रकृति के इस कहर ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया, वहीं कई ग्रामीणों के आशियाने भी इसकी जद में आकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। तूफान का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है। क्यारी समेत आसपास के कई गांवों में किसानों की खेतों में लहराती गेहूं की फसल पूरी तरह बिछ गई और नष्ट हो गई। फसल कटाई के मुहाने पर हुई इस बर्बादी से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसके अतिरिक्त, कई स्थानों पर विशालकाय पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में ग्रामीणों की झोपड़ियां और मकानों की छतें उड़ गईं। भरतपुरी इलाके में एक ऊँची दीवार भरभराकर गिर गई। दीवार के मलबे की चपेट में आने से वहां खड़े कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि दीवार गिरने के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। तूफान के थमने के बाद प्रभावित क्षेत्रें में तबाही के निशान साफ देखे जा सकते हैं। भारी आर्थिक क्षति झेल रहे किसानों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराने और जल्द से जल्द उचित मुआवजा देने की मांग की है। राजस्व विभाग की टीमें नुकसान के आकलन में जुटी हुई हैं।
