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अपराधियों के लिए शरणगाह बन रहा देहरादून, राठी गैंग के दो गुर्गे गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड अपराधियों के लिए शरणगाह बनता जा रहा है। अपराधियों के लिए देहरादून अब सुरक्षित ठिकाना सा ही बन गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस ने कुख्यात सुनील राठी गैंग के दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है। बता दें ये कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि राज्य गठन से पहले भी उत्तराखंड अपराधियों की पनाहगाह रहा है।राजधानी देहरादून दूसरे राज्यों के हिस्ट्रीशीटर्स का ठिकाना बनता जा रहा है। जो शहर कभी अपनी खूबसूरती, शांति और शिक्षा के लिए जाना जाता था, वो शहर आज धीरे-धीरे क्राइम कैपिटल बनता जा रहा है। देहरादून में हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने ना सिर्फ पुलिस प्रशासन, खुफिया एजेंसियों के माथे पर बल ला दिया है बल्कि शहरवासियों की टेंशन भी बढ़ा दी है। क्योंकि अब जो दून पुलिस ने खुलासा किया है वो ये बताने के लिए काफी है कि राजधानी देहरादून दूसरे राज्यों के हिस्ट्रीशीटर्स के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। अपराधी शहर में सक्रिया हैं, लग्जरी कार, टप्च् नंबर के साथ घुम रहे हैं। उन्हें देखकर ये बता पाना भी मुश्किल है कि ये हिस्ट्रीशीटर है। खुद पुलिस को भी नहीं मालूम की देहरादून में कितने अपराधी किस्म के लोग शरण लिए हुए हैं। बता दें हाल ही में एसटीएफ और दून पुलिस ने पौड़ी जेल में बंद कुख्यात सुनील राठी गैंग के दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार बदमाशों में पारस, पहले मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग का शूटर रह चुका है। पुलिस के अनुसार दोनों की मौत के बाद पारस भानू के संपर्क में मुजफ्फरनगर जेल में आया और सुनील राठी गैंग में शामिल हो गया। जेल से बाहर आने के बाद दोनों सुनील राठी के लिए राजधानी देहरादून और हरिद्वार की बेशकीमती विवादित जमीनों में दखल देखकर उगाई करने लगे। जांच में यह भी पता चला कि भानु चौधरी और पारस समय-समय पर जेल में सुनील राठी से मिलने जाते थे और सुनील राठी के नाम की धमकी देकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जमीन के विवादित झगड़ों को सुलझाते थे। बदले में वे मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस को आशंका है कि आरोपी दून में भी रंगदारीया फिर किसी अपराध की साजिश को गढ़ रहे थे। ऐसा नहीं है कि ये कोई पहला मामला है। जिसके खुलासे ने पुलिस अधिकारियों की टेंशन को बढ़ाया है। इससे पहले देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल के बाहर हुई कुख्यात गैंगस्टर की हत्या ने भी खाकी की इकबाल पर सवाल उठाए थे। एक के बाद एक मामले ये सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि क्या उत्तराखंड अपराधियों की शरणगाह बनता जा रहा है और पुलिस बेखर है। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि राज्य गठन से पहले भी उत्तराखंड अपराधियों की पनाहगाह रहा है। बता दें मुन्ना बजरंगी जिसका असली नाम प्रेम प्रकाश था 80 के दशक में आतंक का दूसरा नाम मुख्तार अंसारी का करीबी था। बागपत जेल में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप गैंगस्टर सुनील राठी पर लगा था। इसके अलावा 90 के दशक का रमेश यादव, जिसके अपराधों ने उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। इन सभी ने भी उत्तराखंड में पनाह ली थी। ये वो नाम है जो बंदूक के साथ खिलौनों की तरह खेला करते थे। कई अपराधियों के नाम अब भी गुमनाम है। हालांकि अब लग रहा है कि दून पुलिस इन घटनाओं से सबक ले रही है तभी पुलिस खुफिया निगरानी बढ़ाने का दावा कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन अभियान को और तेज किया जा रहा है। देहरादून को किसी भी सूरत में अपराधियों का शरणगाह बनने नहीं दिया जाएगा।

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