कड़ाके की ठण्ड में गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
हरिद्वार (उद संवाददाता)। सूर्य के उत्तरायण होने के महापर्व ‘मकर संक्रांति’ का आगाज बुधवार को भीषण ठंड और घने कोहरे के बीच पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। हाड़ कंपाने वाली शीत लहर के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी और तड़के से ही हर की पैड़ी सहित गंगा के तमाम घाटों पर स्नान, दान और पूजा- अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रें से देव डोलियों को ढोल और दमाऊं की पारंपरिक थाप के बीच गंगा तट पर लाया गया, जहां उन्हें विधि-विधान से पवित्र स्नान कराया गया। इस वर्ष मकर संक्रांति का महत्व ज्योतिषीय दृष्टि से और भी बढ़ गया है, क्योंकि पूरे 23 वर्षों के बाद संक्रांति और षटतिला एकादशी का एक ही दिन पड़ने का दुर्लभ संयोग बना है। नारायण ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य विकास जोशी ने बताया कि बुधवार दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शास्त्रें में उत्तरायण काल को शुभ कार्यों के िलए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और दान करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 4 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग का निर्माण होने से इस दिन की शुभता और अधिक बढ़ गई है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि 23 साल बाद बने इस विशेष योग में किया गया पुण्य कार्य अक्षय फलदायी होता है। श्रद्धालुओं ने सुबह से ही भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के पश्चात सूर्य नारायण को अर्घ्य दिया। गंगा घाटों पर विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने भाग लिया। इस महापर्व पर तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र और अनाज के दान का विशेष महत्व रहा। ज्योतिषविदों ने इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की विशेष सलाह दी है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आरोग्य की प्राप्ति होती है। भीषण ठंड के बीच प्रशासन द्वारा भी घाटों पर सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
