January 22, 2026

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चार लेबर कोड के खिलाफ देश व्यापी हड़ताल कल

रूद्रपुर। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ;ऐक्टू के पांचवें ऊधमसिंह नगर जिला सम्मेलन का आयोजन गल्ला मंडी में किया गया। इस दौरान आयोजित रैली और सम्मेलन में वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की। ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव के.के. बोरा ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि नए लेबर कोड लागू होने से कर्मचारी और मजदूर पूरी तरह अधिकार विहीन हो जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि पुराने 29 श्रम कानूनों की बहाली की मांग को लेकर देश भर के मजदूर 12 फरवरी 2026 को विशाल हड़ताल करेंगे। राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि देश में कामगारों की मेहनत से उत्पादन के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, लेकिन इसका लाभ मजदूरों को नहीं मिल रहा है। कम भुगतान के कारण श्रमिक बदहाली में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने कानूनों ने मजदूरों को मौलिक अधिकार दिए थे, लेकिन नए कोड के जरिए शोषण को कानूनी मान्यता दी जा रही है। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी की दर 193 रुपये प्रतिदिन तय किए जाने को शर्मनाक बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कहीं भी मजदूरी 500 रुपये से कम नहीं है। साथ ही बोनस के अधिकार को भी सरकार की मर्जी पर छोड़ दिया गया है और निर्माण मजदूरों के कार्ड बनाने की प्रक्रिया कठिन कर उनकी सुविधाएं छीन ली गई हैं। सम्मेलन के पर्यवेक्षक और ऐक्टू उत्तराखंड के राज्य उपाध्यक्ष जोगेंद्र लाल ने कहा कि जिन 29 श्रम कानूनों को हटाया गया है, उन्हें आजादी के संघर्ष के दौरान अंग्रेजी हुकूमत से छीना गया था और डॉक्टर अंबेडकर ने उनकी रूपरेखा तैयार की थी। इन कानूनों को औपनिवेशिक बताकर हटाना असल में मजदूरों पर उत्पीड़न थोपना है। भाकपा माले के जिला सचिव ललित मटियाली ने कहा कि विकसित भारत के नाम पर लाए जा रहे ये कानून केवल चुनिंदा पूंजीपतियों के हित में हैं, जबकि आम जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर गुलामों की फौज में तब्दील किया जा रहा है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जिला अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि इन कोड के लागू होने से श्रमिकों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में कराने, राज्य में न्यूनतम वेतन 38 हजार रुपये प्रतिमाह करने, उत्तर प्रदेश की आशा कार्यकर्ताओं की मांगों को मानने और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग शामिल रही। इसके अलावा मनरेगा कानून की बहाली और निर्माण मजदूर कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को सरल करने का भी प्रस्ताव पारित हुआ। इस अवसर पर ममता पानू, रीता कश्यप, सुधा शर्मा, शर्मिन सिद्दीकी, दयाल सिंह गाड़िया, हीरा राठौर, दीपक कांडपाल, उत्तम दास, अनिता अन्ना, मोहन सिंह बिष्ट, कमल, वीरेंद्र सिंह और मनोज आर्य सहित सैकड़ों श्रमिक उपस्थित रहे।

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