February 13, 2026

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दिवाली पर उल्लुओं की तस्करी रोकने को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व हाई अलर्ट पर

रामनगर। दिवाली नजदीक आते ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व हाई अलर्ट मोड पर आ गया है। हर साल की तरह इस बार भी उल्लुओं के अवैध शिकार की आशंका को देखते हुए पार्क प्रशासन ने कमर कस ली है। वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी फील्ड कर्मचारियों की छुट्टिठ्ठयां रद्द कर दी गई हैं और रात्रिकालीन गश्त को कई गुना बढ़ा दिया गया है। पारंपरिक अंधविश्वास के चलते उल्लुओं की बलि देने की प्रथा कुछ स्थानों पर अब भी जारी है। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू है और दिवाली की रात उसकी बलि देने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है। इसी भ्रामक धारणा के कारण हर साल दिवाली के आसपास उल्लुओं की तस्करी और हत्या के मामले सामने आते हैं। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि यह केवल वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है। उल्लू पर्यावरण में कृंतक नियंत्रण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस खतरे को देखते हुए बिजरानी, ढिकाला, झिरना, ढेला और दुर्गा देवी जैसे कॉर्बेट के प्रमुख जोनों में विशेष गश्त की जा रही है। उत्तर प्रदेश से सटी दक्षिणी सीमा पर भी विशेष चौकसी बरती जा रही है। इस अभियान में उत्तर प्रदेश वन विभाग भी कॉर्बेट प्रशासन के साथ संयुत्तफ रूप से कार्य कर रहा है। वन्यजीव प्रेमी छिम्वाल ने कहा, ष्यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिवाली जैसे पर्व पर लोग अंधविश्वास में आकर निर्दाष पक्षियों की बलि देते हैं। हमें समाज में व्यापक जागरूकता लानी होगी कि उल्लू धन का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। वहीं, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के एसडीओ अमित ग्वासाकोटी ने कहा,दिवाली के दौरान उल्लू के शिकार की आशंकाओं को देखते हुए पूरे रिजर्व को अलर्ट पर रखा गया है। कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और सीमा क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हमारा उद्देश्य है कि किसी भी कीमत पर वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे।कॉर्बेट प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि यदि किसी को उल्लू या अन्य वन्यजीवों के शिकार, तस्करी या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें। प्रशासन का कहना है कि केवल सरकारी प्रयास नहीं, जन सहयोग और जागरूकता से ही इन निरीह पक्षियों की रक्षा की जा सकती है।

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