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सीएम ने व्यक्त किया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार : जिन मूल्यों, आकांक्षाओं के लिए ये राज्य अस्तित्व में आया, उन्हें पूरा करना हम सबकी जिम्मेदारी

देहरादून। देवभूमि पधारने पर समस्त उत्तराखंड वासियों की ओर से सीएम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  का आभार व्यक्त किया। कहा कि उन बेटियों को भी बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने वर्ल्ड कप जीतकर हमारी बेटियों को नई प्रेरणा दी है। यह दूसरा अवसर है जब उत्तराखंड की विधानसभा में देश के राष्ट्रपति का अभिभाषण हो सकता है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी ने संबोधित किया था। 25 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर आत्मगौरव का क्षण है। सभी ज्ञात-अज्ञात राज्य आंदोलनकारियों को नमन करता हूं, जिनके त्याग व बलिदान के कारण ये राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। जिन मूल्यों, आकांक्षाओं के लिए ये राज्य अस्तित्व में आया, उन्हें पूरा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। हम आपके आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य को सशक्त बनाने का काम करेंगे। रजत जयंती के अवसर पर राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह ने राष्ट्रपति का आभार जताया।

उन्होंने कहा कि देवभूमि के प्रति आपके अपार स्नेह से हम उत्तराखंड के लोग अभिभूत हैं। आपका मार्गदर्शन हमें सदैव राष्ट्रहित सेवा व संवेदना की भावना से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। इस विशेष सत्र में राज्य की विकास यात्र पर चर्चा की जाएगी। भविष्य के विकास के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया जाएगा। इस सत्र में चर्चा-परिचर्चा से राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। यह विशेष सत्र उत्तराखंड के उज्जवल भविष्य की नींव रखेगा। 25 वर्षों में देवभूमि उत्तराखंड ने कई उपलिब्धयां हासिल की हैं। यह कालखंड उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण रहा है। हमारा प्रदेश समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखंड की ओर अग्रसर है। प्रदेश के विकास में मातृशक्ति, युवा शक्ति और पूर्व सैनिकों की अहम भागीदारी उल्लेखनीय है। 25 वर्षों में हमारे राज्य ने पर्यटन समेत कई क्षेत्रें में उल्लेखनीय उपलिब्धयां हासिल की हैं। मेरे विचार में विकसित उत्तराखंड का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति तक नहीं बल्कि चहुंमुखी विकास से है, जहां प्रगति व प्रकृति दोनों साथ चलें। पहाड़ों में पलायन रोकने, स्थानीय उत्पदों को वैश्विक पहचान देने, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीकी से जोड़ने, सुशासन को हर गांव तक पहुंचाना हमारा संकल्प है। आईए कम संकल्प लें कि हर व्यक्ति बेहतर जीवनयापन करें, महिलाओं को आगे बढ़ने का संबल मिले। किसानों का कल्याण हो, युवा आगे बढ़ें।

विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत संबोधन में कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। प्रदेश की विधानसभा के लिए भी यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अजात शत्रु स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के निर्णय से नवंबर 2000 में अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखण्ड विधानसभा की पहली बैठक 12 जनवरी 2001 के दिन आयोजित की गई। तब से अब तक भारतीय लोकतंत्र के उच्च सिद्धांतों और परम्पराओं पर चलते हुए, उत्तराखंड विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनभावना के अनुरूप प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में समुचित विकास सुनिश्चित करने हेतु भराडीसैंण – गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, अब वहां भी एक विधानसभा भवन संचालित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड विधानसभा ने ग्रीन इनिसिटेव के तहत अब पेपरलेस विधायिका की ओर कदम बढ़ दिए हैं। देहरादून के साथ ही भराडीसैंण विधानसभा परिसर में भी नेशनल ई विधान एप्लकेशन लागू किया गया है। विधानसभा में ई लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के विकास में शोध के महत्व पर जोर देते हैं, इसके लिए भराडीसैंण विधानसभा के अंतर्गत, पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रवण मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग शुरु किया गया है। जिसे विधायी और संसदीय कार्य के साथ ही पॉलिसी प्लानिंग में उच्चकोटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन से सबमें नई उर्जा का संचार होगा, जिससे उत्तराखण्डवासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल की दिशा में संकल्पित होकर कार्य कर सकेंगे।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में प्रदेश की 25 वर्ष की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कालखण्ड उत्तराखण्ड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना निर्माण का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड “समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखण्ड” की दिशा में निरंतर अग्रसर है। राज्यपाल ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करें।

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