ज्ञान और संस्कारों की धरोहर हैं पुस्तकेंः धामी
मुख्यमंत्री ने किया दून बुक फेस्टिवल-2026 का उदघाटन
देहरादून(उद संवाददाता)। परेड ग्राउंड में आयोजित दून बुक फेस्टिवल -2026 का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधिवत उद्घाटन किया। 12 अप्रैल तक चलने वाले इस भव्य पुस्तक महोत्सव में साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का शुभारंभ किया और विभिन्न प्रकाशकों के स्टालों का अवलोकन भी किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुस्तकों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि डिजिटल युग में भी किताबों की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में फूलों के गुलदस्ते (बुके) देने के बजाय पुस्तकें (बुक) भेंट करने की एक स्वस्थ परंपरा शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में पढ़ने की संस्कृति को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने जानकारी दी कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और महान विभूतियों से परिचित कराने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में ‘हमारी विरासत एवं महान विभूतियां’ नामक पुस्तक शामिल की गई है। यह पहल युवाओं को उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास और यहां के महान व्यक्तित्वों के संघर्ष व योगदान से जोड़ने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री धामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समय से परे ज्ञान का ऐसा प्रकाश हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को दिशा देती हैं। उन्होंने युवाओं और बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि पुस्तकें वास्तव में हमारे दिमाग की खुराक हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट हमें केवल सूचनाएं दे सकता है, लेकिन गहन सोच और समझने की शक्ति केवल पुस्तकों के अध्ययन से ही विकसित होती है। मोबाइल सूचनाओं का आदान-प्रदान सरल बनाता है, लेकिन पुस्तकें हमारी सोच को गहरा और स्थाई बनाती हैं। उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ और ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ के जरिए रचनाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा राज्य में दो श्साहित्य ग्रामश् स्थापित किए जा रहे हैं। इन ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आधुनिक पुस्तकालय, संगोष्ठी कक्ष और अध्ययन स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे सृजन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। अपने सम्बोधन में सीएम ने महर्षि वेदव्यास, महाकवि कालिदास से लेकर सुमित्रनंदन पंत, महादेवी वर्मा, रस्किन बॉन्ड और शैलेश मटियानी जैसे दिग्गजों को याद किया। उन्होंने कहा कि इसी पावन धरा पर महाभारत की रचना हुई और रविंद्रनाथ टैगोर ने गीतांजलि के अंश लिखे। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि उत्तराखंड की धरती ने गुमानी पंत और मोलाराम जैसे कवियों को जन्म दिया, जिन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं को समृद्ध किया। 12 अप्रैल तक चलने वाले इस मेले में देशभर के प्रख्यात साहित्यकार हिस्सा ले रहे हैं। मेले में लेखक से मिलिए, पुस्तक परिचर्चाएं और विशेष चिल्ड्रन पवेलियन बनाया गया है, जहां बच्चों के लिए स्टोरी टेलिंग और क्विज जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
