February 11, 2026

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उत्तराखंड में ‘वक्फ़ की संपत्तियों’ में हुआ ‘बड़ा खेल’ : अनेक बेशकीमती वक्फ संपत्तियों के रिकार्ड गायब

किसी बड़े घोटाले की आशंका, मुख्यमंत्री धामी से की गई उच्च स्तरीय जांच की मांग
देहरादून। संसद से नया वक्फ कानून पारित होने के बाद अब उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य में स्थित सभी वक्फ संपत्तियों को नए वक्फ संशोधन कानून के तहत रजिस्टर करने की कवायद आरंभ कर दी गई है और सूबे का वक्फ बोर्ड प्रदेश में स्थित तमाम वक्फ संपत्तियों की छानबीन कर रहा है। जैसे-जैसे बोर्ड की छानबीन आगे बढ़ रही है ,वैसे-वैसे राज्य में वक्फ संपत्तियों को लेकर किए गए बड़े-बड़े खेल सामने आने लगे हैं। वक्फ बोर्ड की छानबीन में सामने आया है कि राज्य में अनेक कीमती वक्त संपत्तियां पर अवैध रूप से कब्जा किया जा चुका है और अनेक वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड भी गायब है , ऐसे में उनके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाना वक्फ बोर्ड के लिए बेहद चुनौती पूर्ण साबित हो रहा है। ज्ञात हो कि नए कानून के अनुसार देशभर में वक्फ संपत्तियों का एक तय समयसीमा के भीतर पंजीकरण किया जाना था। उत्तराखंड में भी दिसंबर तक यह प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन तय समय में काम पूरा नहीं हो सका। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जिसके बाद वक्फ ट्रिब्यूनल ने सभी राज्यों को अलग-अलग समयसीमा तय करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने गढ़वाल मंडल के लिए 6 फरवरी और कुमाऊं मंडल के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख तय की है, लेकिन वक्फ संपत्तियों की रजिस्ट्रेशन की यह प्रक्रिया निर्धारित समय अवधि तक पूरी हो पाना कठिन है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि राज्य में करीब 5 हजार वक्फ संपत्तियां हैं। जिनमें मदरसे, दरगाह, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थल शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर वर्षों से अवैध कब्जा चला आ रहा है। जिसके चलते इनका रजिस्ट्रेशन कराना बेहद कठिन साबित हो रहा है। उनके अनुसार वक्फ की जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे माफिया जानबूझकर इन संपत्तियों को बोर्ड में दर्ज नहीं होने देना चाहते ,ताकि उनके अवैध कब्जे पर कार्रवाई न हो सके। उन्होंने आगे बताया किवक्फ की अनेक संपत्तियों के रिकॉर्ड के वक्त बोर्ड के पास ही मौजूद नहीं है। उनके अनुसार यह एक बड़ा घोटाला हो सकता है और उनके द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संबंधित विभागीय सचिवों से लगातार चर्चा की जा रही है। यदि तय समयसीमा के भीतर वक्फ संपत्तियों रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया तो ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वक्फ बोर्ड अब इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। उनके मुताबिक वक्फ की संपत्तियां गरीबों, धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए होती हैं, लेकिन माफियाओं ने इन्हें निजी स्वार्थ के लिए हड़प लिया है। अब सरकार के निर्देश पर बोर्ड की कोशिश यह है कि ऐसी संपत्तियों को जल्द से जल्द माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया जाए। देखा जाए तो उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे एवं रिकॉर्ड में हेर फेर करके संपत्ति कब्जा करने के विरुद्ध आरंभ की गई मुहिम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई जान पड़ती है । एक तरफ सरकार और वक्फ बोर्ड रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर अवैध कब्जेदारों पर शिकंजा कसने की तैयारी भी चल रही है।

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