February 12, 2026

Uttaranchal Darpan

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भूख हड़ताल पर बैठे भूपेंद्र कोरंगा को पुलिस ने जबरन उठाया: पुलिस की कार्रवाई पर जमकर हंगामा, नोंक झोंक

हल्द्वानी (उद संवाददाता)। यूकेएस एसएससी पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर बीते पांच दिनों से बुध पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे भूपेंद्र कोरंगा को पुलिस ने बलपूर्वक उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस दौरान धरना स्थल पर जमकर हंगामा, नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई। मौके पर मौजूद महिलाओं और समर्थकों की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें कुछ महिलाओं को चोटें भी आईं और कपड़े फटने की भी सूचना है। भूपेंद्र कोरंगा बीते पांच दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे और उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा था। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कई बार उन्हें मनाने पहुंचे, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। शुक्रवार सुबह भी पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम अनशन स्थल पर पहुंची और कोरंगा से बातचीत कर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सीबीआई जांच और पेपर रद्द करने की मांग नहीं मानी जाती,तब तक वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। रविवार शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी भूपेंद्र कोरंगा से दूरभाष पर वार्ता कर भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया था। लेकिन कोरंगा अपने मांगों पर अडिग रहे। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सीबीआई जांच और पेपर रद्द करने का आदेश नहीं होगा तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। आज दोपहर अचानक भारी पुलिस बल धरना स्थल पर पहुंचा और बिना सहमति के भूपेंद्र कोरंगा को उठाकर एंबुलेंस में बैठा दिया गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया । इस कार्रवाई के विरोध में मौके पर मौजूद युवाओं, महिलाओं और अभिभावकों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्वक चल रहे धरने को जबरन हटाया गया और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुछ महिलाओं को धक्का-मुक्की में चोटें आईं, वहीं कुछ के कपड़े भी फट गए। युवाओं ने पुलिस प्रशासन पर एकतरफा और अमानवीय कार्रवाई का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। धरना स्थल पर मौजूद युवाओं ने ऐलान किया कि यदि सरकार ने जल्द ही सीबीआई जांच और पेपर रद्द करने की घोषणा नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। युवाओं ने कहा कि यह केवल एक भर्ती परीक्षा का मुद्दा नहीं है, यह उनके भविष्य और भरोसे की लड़ाई है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में विगत वर्षों में आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं में बड़े स्तर पर पर्चा लीक और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। अब तक यूकेएस एसएससी और अन्य परीक्षाओं को लेकर दर्जनों गिरफ्तारी और जांचें हो चुकी हैं, लेकिन आंदोलनरत युवाओं का कहना है कि सरकारी स्तर पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता अभी भी नहीं दिखाई दे रही।

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