बंगाली समाज के आंदोलन को मिला पूर्व सीएम हरीश रावत का समर्थन
शक्तिफार्म। सितारगंज के सिडकुल फेज-2 में मत्स्य पालन विभाग की प्रस्तावित एक्वा पार्क परियोजना के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ चल रहे नौवां दिन शुक्रवार को बड़े राजनीतिक रंग में उभर आया। इस अवसर पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत धरना स्थल पर पहुंचे और बंगाली समाज के संघर्ष को खुला समर्थन दिया। जनसमूह को संबोधित करते हुए रावत ने कहा कि बंगाली भाइयों की यह लड़ाई अब हम लड़ेंगे, कांग्रेस इस संघर्ष में आपके साथ चट्टðान की तरह खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पलसिया के परिवारों को हटाने का निर्णय किसी अधिकारी या मंत्री का व्यक्तिगत फैसला नहीं है, यह केवल कैबिनेट का निर्णय है, और इसे बदलने का अधिकार भी केवल कैबिनेट के पास ही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी मंत्री या नेता के दबाव में गलत कार्यवाही करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच पाएंगे। रावत ने यह भी कहा कि कानून किसी को जबरन नहीं हटा सकता जब तक उन्हें वैकल्पिक जमीन, मकान और समुचित सुविधाएँ न दी जाएँ। उन्होंने याद दिलाया कि पलसिया में बसे बंगाली परिवारों को भारत सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत बसाया गया था, इसलिए उनके अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं। रावत ने भाजपा नेता मुन्ना सिंह चैहान पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि चैहान इतिहास नहीं जानते, वे सिर्फ भाजपा की किताबों में उलझे हुए हैं। अगर ऐसे लोग कांग्रेस में होते, तो हम उन्हें ‘झुनझुना सिंह’ बना कर बाहर कर देते। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग अपनी जनता की लड़ाई नहीं लड़ सकते, वे जनता के नेता कैसे हो सकते हैं। धरना स्थल पर उपस्थित ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने रावत के संबोधन के दौरान जोरदार समर्थन जताया। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष सुमित मंडल, उत्तम आचार्य, नवतेज पाल सिंह, हरीश दुबे, भवतोष आचार्य, राम नगीना प्रसाद, रामचंद्र राय, पूर्व विधायक नारायण पाल, प्रेमानंद महाजन, डॉ. गणेश उपाध्याय, त्रिनाथ विश्वास, तारक बाछाड़ सहित कई लोग मौजूद रहे।
