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बाजपुर का सरकारी अस्पताल बन चुका है रेफरल एक्सप्रेस

बाजपुर। क्षेत्र के डॉक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर सरकार के राजकाज को कटघरे में खड़ा कर दिया। बाजपुर निवासी डॉक्टर सौरभ परमार ने सूबे के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री को संबोधित पत्र सोशल मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुप में डाला है। वायरल शिकायती पत्र में बताया गया कि बाजपुर का सरकारी अस्पताल रेफरल एक्सप्रेस बन चुका है। यहां 98» रोगियों को रेफर करने का काम किया जा रहा है। पोस्टमार्टम भवन को सिस्टम की लाश का असली घर बताया गया। कहा की पोस्टमार्टम हाउस में सिस्टम का विच्छेदन होना चाहिए। आॅक्सीजन प्लांट सिर्फ तस्वीरों में चालू है धरातल पर पूरी तरह बंद है। स्वास्थ्य मंत्री की और नाकामियां गिनाते हुए शिकायतकर्ता डॉक्टर ने कहा कि सर्जन डॉक्टर ना होने के कारण पिछले 3 वर्षों से आॅपरेशन ठप है। अस्पताल में उपचार के नाम पर रोगियों से दुर्व्यवहार की शिकायत है। आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जब भी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया जाता है पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सच्चाई छुपाने की दीवार बन जाती है। कैमरों की चमक जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे और चापलूसी के बीच अस्पताल की बदहाली दम तोड़ देती है। तल्ख लहजे में यह भी कहा कि सरकार सिर्फ भाषणों में चमकदार दिख रही है जबकि हकीकत को आम जनता ने बाखूबी समझ लिया। शिकायतकर्ता डॉक्टर ने प्रेषित पत्र में अपील किया है कि अगली बार जब कभी मंत्री जी अस्पताल का मुआयना करने आए तो उन्हें अकेले आना चाहिए ताकि आंख पर पड़ा पर्दा हट सके। वहीं काशीपुर का सरकारी अस्पताल भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हाशिए पर है। अस्पताल के गेट पर एंबुलेंस की मंडी लगती है। जानकारों की माने तो प्राइवेट अस्पताल की एंबुलेंस को हॉस्पिटल कैंपस में परमानेंट तरीके से खड़ा कराया जा रहा है। रोगियों के साथ दुर्व्यवहार एवं विभिन्न तरीकों से उनका दोहन अस्पताल की नियती बन चुका है। बताया गया कि अस्पताल परिसर में पूरे समय दलाल सक्रिय रहते हैं। प्राइवेट अस्पतालों से तगड़ी सांठ-गांठ गांठ के कारण गंभीर रोगियों एवं एक्सीडेंटल मामलों को मोटे कमीशन के लालच में रेफर करने का काम किया जा रहा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि ओपीडी में बैठे डॉक्टर स्वास्थ्य महकमे के नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से बाहर की दवाइयां प्रिसक्राइब कर रहे हैं। इसके साथ ही दूर दराज से आने वाले रोगियों को महंगी जांचों के लिए बाहर भेजा जा रहा है।

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