अंकिता हत्याकांडः क्या अब सीएम धामी चलेंगे ‘मास्टर स्ट्रोक’
दबाव में नहीं बल्कि जनभावनाओं के अनुरूप हर कदम उठाने को तैयार मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस सड़कों पर है और विपक्ष के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा रखा हैं। कांग्रेस पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी पत्नी, टीवी कलाकार उर्मिला सनावर के कथित ऑडियो वार्तालाप को आधार बनाते हुए अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच और उसे सजा दिलाने की मांग कर रही है। वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और कांग्रेस इस मुद्दे के सहारे जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाह रही है। इससे पूर्व भी कांग्रेस ने कई मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व क्षमता के आगे कांग्रेस कामयाब होती नही दिखी। लेकिन लंबे समय से आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस अंकिता हत्याकाण्ड के मुद्दे पर अपने अंतर्विरोधों को दरकिनार कर एकजुट होकर सरकार पर हमलावर है। हालांकि, पति-पत्नी के कथित वार्तालाप में कई विरोधाभास सामने आ रहे हैं, जिनका न्यायालय में टिक पाना बहुत मुश्किल है। सोशल मीडिया पर सामने आये ऑडियो में पूर्व विधायक नशे में प्रतीक हो रहे है जिसके चलते वार्तालाप की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। साफ है कि निजी विवाद के चलते उर्मिला सनावर ने अपने पति से जुड़े वार्तालाप सार्वजनिक किए। जिसके सहारे कांग्रेस ने अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गंभीरता को चुप्पी बताते हुए उस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हालांकि, विपक्ष यह भूल रहा है कि मुख्यमंत्री धामी जितने गंभीर स्वभाव के हैं, उतने ही दृढ़ निर्णय लेने वाले भी हैं। यदि उर्मिला की नीयत वास्तव में न्याय दिलाने की होती, तो उन्हें सबसे पहले जांच एजेंसियों या न्यायालय का रुख करना चाहिए था। वहां से निराशा मिलने पर सार्वजनिक कदम उठाना अधिक तार्किक और स्वीकार्य होता। पूरे मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति तो गरमा चुकी है लेकिन अभी तक ऐसा कोई भी सबूत जांच टीम तक नही पहुंचा जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू हो सके। जहां तक अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच का प्रश्न है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस दिशा में कोई भी निर्णय लेने में पीछे हटने वाले नही हैं। भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री पद तक की उनकी कार्यशैली यह स्पष्ट करती है कि वहे किसी दबाव में नहीं, बल्कि जनहित को सर्वाेपरि रखते हुए निर्णय लेते हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव यह भी सिखाता है कि जब किसी विषय पर जनाक्रोश बढ़ता है, तो उसका समाधान निकालना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री धामी द्वारा अब तक लिए गए कई ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि वे प्रदेश और जनता के हित में समयानुसार हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तत्पर रहते हैं,चाहे वह सीबीआई जांच का आदेश ही क्यों न हो। आवश्यकता पड़ी तो वह इस मुद्दे पर मास्टर स्ट्रोक खेल कर विरोधियों को पटकनी देने में भी पीछे हटने वाले नही हैं।
