जनता की हाहाकार के बाद प्रशासन की खुली नींद,सिलेंडर की होगी होम डिलीवरी,एजेंसी से पूरी तरह रोक
रुद्रपुर (उद ब्यूरो)। आखिर गैस की किल्लत कब खत्म होगी ? यह यक्ष प्रश्न अब आम लोगों के जेहन में दहशत पैदा कर रहा है। खाड़ी देशों में युद्ध की आग से उपजे तेल और गैस के संकट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की अपील का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। लोग जहां गैस एजेंसियों पर डेरा जमाने लगे है तो वहीं दूसरी तरफ गरीब तबके के लोग भारी कीमत चुकाकर जैसे तैसे गुजारा करने पर मजबूर हो गये हैं। रसोई गैस सिलेंडर इन दिनों जरूरत से ज्यादा एक जंग बन चुका है। रुद्रपुर में स्थित विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर रोज सूर्य उदय होने से पहले ही सैकड़ों लोग घरेलू सिलेंडर हाथ में लिए लाइन में खड़े नजर आते हैं। अंधेरे में शुरू हुई कतारें दिन चढ़ने तक लंबी होती जाती हैं, लेकिन जैसे ही गैस की गाड़ी पहुंचती है, इंतजार का धैर्य टूट जाता है और माहौल अचानक हंगामे में बदल जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूरी करने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद जैसे ही आगे बढ़ते हैं, धक्का- मुक्की और बहस शुरू हो जाती है। कई बार स्थिति हाथापाई तक पहुंच जाती है। भीड़ इतनी बेकाबू हो जाती है कि हालात संभालना मुश्किल हो जाता है। लोगों के चेहरों पर गुस्सा साफ दिखता है और वजह भी साफ है । घर में चूल्हा जलाने की मजबूरी। इस बीच उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत सामने आई। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने समय पर गैस बुक कराई, मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भी आया, लेकिन जब वे सिलेंडर लेने पहुंचे तो पता चला कि उनका सिलेंडर पहले ही किसी और को दे दिया गया। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया और एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। शुरुआत में हालात बिगड़ते रहे और एजेंसियों पर खुलेआम गोदाम से सिलेंडर बांटे जाते रहे। प्रशासन की मौजूदगी न के बराबर दिखी और अव्यवस्था लगातार बढ़ती गई। लेकिन जब हंगामा बढ़ा और हालात काबू से बाहर होने लगे, तब प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस बल भी लगाया गया ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए गैस एजेंसी संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब किसी भी स्थिति में गोदाम या एजेंसी से सीधे सिलेंडर वितरण नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी की ओर से साफ आदेश जारी किया गया कि गैस सिलेंडर केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। एजेंसी संचालकों ने भी अब प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की बात कही है, हालांकि उनका कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रशासन की सख्ती के बाद व्यवस्था सुधारने की कोशिश शुरू हो गई है, लेकिन सवाल अब भी कायम है अगर पहले ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाती, तो क्या लोगों को इस तरह सड़कों पर उतरकर सिलेंडर के लिए संघर्ष करना पड़ता? अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह सख्ती जमीन पर कितनी उतरती है और आम जनता को राहत मिलती है या नहीं
