धामी की हार के बाद ‘खटीमा वासियों’ की सुध लेने वाला कोई नहीं
खटीमा के यात्रियों को रुद्रपुर बस स्टैंड की छत तक नसीब नहीं, मौसम की दुश्वारियों के बीच खुले आसमान के नीचे बस की प्रतीक्षा करने को मजबूर
रुद्रपुर। ऐसा जान पड़ता है, जैसे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पिछले विधानसभा चुनाव में खटीमा विधानसभा सीट से पराजित होने के बाद अब जिले में खटीमा वासियों की सुध लेने वाला कोई नहीं रह गया है। कदाचित यही कारण है कि आजकल खटीमा निवासियों की कहीं भी पूछ परख नहीं रह गई है और उन्हें सामान्य उत्तराखंड वासियों को प्राप्त मिलने वाली साधारण सुविधा भी नसीब नहीं हो पा रही है। ज्ञात हो कि उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर से खटीमा जाने के लिए वैसे तो इक्का दुक्का सरकारी बसें दिन भर मिलती रहती हैं, लेकिन सितारगंज, खटीमा, टनकपुर बनबसा आदि शहरों के लिए ज्यादातर बसें रात्रि 8ः00 बजे के बाद ही मिलती है। इनमें से अधिकांश बसें दिल्ली, देहरादून, हल्द्वानी आदि शहरों से आती हैं उपरोक्त बसें रुद्रपुर बस टर्मिनल के भीतर न जाकर बस अड्डे के उत्तरी दरवाजे के सामने स्थित महाराजा होम के सामने कुछ देर के लिए रूकती है और वहीं से सवारी लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाती है। ऐसी स्थिति में सितारगंज, खटीमा, टनकपुर, बनबसा आदि स्टेशनों की ओर जाने वाले यात्रियों को महाराजा होम के सामने ही उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। खास बात तो यह है कि बस यात्रियों की यह प्रतीक्षा बारह महीने खुले आसमान के नीचे ही होती है। मौसम चाहे गर्मी का हो अथवा बरसात का हो या फिर हाड़ कंपा देने वाली सर्दी का , खुले आसमान के नीचे मौसम की दुश्वारियां से जूझते हुए बस की प्रतीक्षा करना ही जैसे इन यात्रियों की नियति- सी बनकर रह गई है। भुक्त भोगी यात्री बताते हैं कि रात्रि के समय खटीमा की ओर जाने वाली कोई भी बस बस स्टैंड के भीतर नहीं जाती । ऐसे में मजबूरन उन्हें महाराजा होम के सामने सड़क पर खड़े होकर देर रात तक बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। चूँकि उत्तराखंड परिवहन निगम की खटीमा की ओर जाने वाली बसें बस स्टैंड के भीतर नहीं जाती हैं, इसलिए यात्रियों को बस के आने या ना आने तथा लेट होने के संबंध में बस स्टैंड के पूछताछ केंद्र से कोई भी जानकारी नहीं प्राप्त हो पाती, साथ ही वे बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में बैठकर प्रतीक्षा बस का इंतजार भी नहीं कर पाते और ना ही उन्हें बस स्टैंड के प्रांगण में स्थापित कैंटीन की सुविधा का लाभ प्राप्त हो पाता है। यात्रियों का कहना है कि खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करते समय कई बार महिला यात्रियों को स्थानीय टेंपो एवं टुकटुक चालकों, नशेड़ियों एवं आवारा तत्वों की बदतमीजियों का भी शिकार होना पड़ता है, लेकिन अपने शहर से बाहर होने के कारण उन्हें सब कुछ बर्दाश्त करना पड़ता है। यात्रियों ने बताया कि दिन के समय जो बस रुद्रपुर से खटीमा की ओर जाती हैं, वे तो बस स्टैंड के भीतर से मिल जाती हैं, लेकिन अन्य शहरों से खटीमा की ओर जाने वाली उत्तराखंड परिवहन निगम की बस के चालक बस को बस स्टैंड के भीतर नहीं लेकर जाते। इस स्थिति में यात्रियों को अपना एक पैर बस स्टैंड के भीतर रखना पड़ता है तो दूसरा पैर बस स्टैंड के बाहर । कई बार यात्रियों के साथ परिवार के अन्य सदस्य और लगेज भी अपेक्षाकृत ज्यादा होता है, ऐसे में उन्हें खासी मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है।
