पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के आवास पर चला प्रशासन का डंडा
गूलरभोज । सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के अनुपालन में गदरपुर तहसील प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक अरविंद पांडेय के आवास परिसर में बने कैंप कार्यालय के एक हिस्से को अवैध अतिक्रमण के रूप में चिन्हित करते हुए नोटिस थमाया है। मंगलवार शाम तहसील की राजस्व टीम ने विधायक के आवास पहुंचकर यह कार्रवाई की, जिसके बाद से क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।गदरपुर तहसील के कानूनगो भगत सिंह के नेतृत्व में पटवारी सुरजीत सिंह, हरजीत सिंह, जितेंद्र सिंह और सरताज अली की टीम विधायक अरविंद पांडेय के आवास पर पहुंची। विधायक की अनुपस्थिति में राजस्व टीम ने उनके पुत्र अतुल पांडेय को नोटिस सौंपा। कानूनगो भगत सिंह ने बताया कि सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार मामले में दिए गए अदालती निर्देशों के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है। जांच के दौरान खाता संख्या 64, खसरा संख्या 12 ग में रास्ते के एक ओर सिंचाई विभाग की नहर और दूसरी ओर विधायक आवास के सामने करीब 0.158 हेक्टेयर भूमि पर अवैध निर्माण पाया गया है। प्रशासन ने विधायक पक्ष को इस अवैध अतिक्रमण को खुद हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है।नोटिस मिलने के बाद विधायक पुत्र अतुल पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे लोग वर्ष 2015 से यहां काबिज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे तहसील प्रशासन का साधुवाद करते हैं कि 11 साल बाद उन्हें इस जगह की सुध आई है। अतुल पांडेय ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जिनकी शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि उनके पिता परिवार के अभिभावक हैं और उनके आने के बाद ही इस मामले में आगे का निर्णय लिया जाएगा। इधर विधायक के आवास पर नोटिस दिए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में समर्थकों का जमावड़ा लग गया। समर्थकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे राजनीतिक विद्वेष और बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया।इस पूरे मामले पर गदरपुर की तहसीलदार लीना चंद्रा धामी ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार गदरपुर, दिनेशपुर और गूलरभोज क्षेत्र में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 तारीख को विधायक के खिलाफ एक शिकायती पत्र प्राप्त हुआ था, जिसकी राजस्व टीम से जांच कराई गई। जांच में 0.158 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पुष्ट होने के बाद ही नोटिस जारी किया गया है। तहसीलदार ने कहा कि यदि विधायक के पास इस भूमि से संबंधित कोई वैध साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
