बनभूलपुरा छावनी में तब्दील : एसएसपी मंजूनाथ टीसी के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस तैनात,7 ड्रोन कैमरे की निगरानी
हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे भूमि पर अतिक्रमण मामले में आज 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के पश्चात अपना फैसला सुनाया जा सकता है। सभी की नजरें कोर्ट के फैसले में टिकी हुई हैं। फैसला आने से पहले ही जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। इसके लिए रेलवे अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन बैठक कर चुका है। जहां बनभूलपुरा क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है तो वहीं खुफिया तंत्र को भी एक्टिव किया जा चुका है। संवेदनशील क्षेत्र बनभूलपुरा में भारी फोर्स को तैनात कर दिया है। गौरतलब हो कि वर्ष 2022 में रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की गई थी। वर्ष 2023 में नैनीताल हाईकोर्ट ने इस जमीन को खाली करने के आदेश जारी किए थे। जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था। लेकिन विरोध और स्थानीय लोगों द्वारा सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने के बाद मामला टल गया था। तब से लेकर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रहा थी। अब आज मंगलवार को सुनवाई के पश्चात सुप्रीम कोर्ट, रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बड़ा फैसला दे सकती है। बनभूलपुरा क्षेत्र में लगभग 3660 मकान हैं। जिसमें तकरीबन 5236 परिवार निवास करते हैं।एसपी क्राइम डॉक्टर जगदीश चंद्रा ने बताया कि रेलवे अतिक्रमण भूमि मामले में कोर्ट का फैसला आ सकता है। जिसको लेकर पुलिस प्रशासन ने सभी तैयारी कर ली है। सोमवार को आरपीएफ और जिला पुलिस ने क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर लोगों को अपील की है कि किसी भी भ्रामक अफवाओं में ध्यान न दें। कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, उसका सम्मान किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले में नजर बनाए हुए है। माहौल खराब करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा। बतादें कि 8 फरवरी 2024 में जिला प्रशासन द्वारा बनभूलपुरा में नजूल भूमि पर अतिक्रमण कर मदरसा बनाए जाने के मामले में ध्वस्तीकरण के दौरान बवाल हो गया था। बवाल के दौरान अराजक तत्वों द्वारा बनभूलपुरा थाने को आग के हवाले करते फोर्स और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर पथराव कर घायल कर दिया था। मामले को देखते हुए प्रशासन ने अराजकतत्वों पर कार्रवाई भी की थी। बवाल के दौरान हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अधिकारी, पुलिस कर्मी, मीडिया कर्मी चोटिल भी हुए थे। कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन द्वारा कर्फ्यू भी लगाया गया था। अब जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क मोड पर है। वहीं लोगों से भी लगातार शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस से सहयोग करने की लगातार अपील की जा रही है।
हल्द्वानी । रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में निर्णय के उपरांत शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी के नेतृत्व में नैनीताल पुलिस द्वारा चाक चौबंद व्यवस्था के साथ ही ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में सोमवार को एसपी नैनीताल डॉ जगदीश चंद्रा व एसपी हल्द्वानी मनोज कत्याल के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा व्यापक चैकिंग अभियान चलाकर 121 उपद्रवी लोगों के विरुद्ध 126/135 बीएनएस के तहत निरोधात्मक कार्यवाही की गई ओतथा 21 लोगों को जिसमें से अधिकांश द्वारा बनभूलपुरा हिंसा प्रकरण में भी थाने में आगजनी तथा तोडफोड की घटना को अंजाम दिया गया था। इनके द्वारा वर्तमान में भी लोगों को एकत्र कर दंगा भड़काने का प्रयत्न करने की प्रबल संभावना के दृष्टिगत चिन्हीकरण कर धारा 170 बीएनएस के तहत हिरासत में लिया गया है। इनके द्वारा वर्तमान में भी लोगों को एकत्र कर दंगा भड़काने का प्रयत्न करने की प्रबल संभावना के दृष्टिगत चिन्हीकरण कर धारा 170 बीएनएस के तहत हिरासत में लिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. मंजूनाथ टीसी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। पूर्व में दंगे में शामिल, लोगों को भड़काने वाले तथा आदतन उपद्रवियों का चिन्हीकरण कर उनके विरुद्ध पुलिस कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। पुलिस हर मोर्चे पर तैयार है। फील्ड के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी प्रकार से भ्रामक सूचना फैलाने, भड़काऊ संदेश प्रचारित करने तथा कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों पर भी कड़ी कार्यवाही की जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु भारी संख्या में पुलिस तैनात किया गया है। जिनमें पुलिस अधीक्षक 03, पुलिस उपाधीक्षक 04, निरीक्षक 08, उप निरीक्षक 28, हेड कांस्टेबल 80, पीएसी 02 कंपनी व 01 सेक्शन इसके अतिरिक्त फायर टेंडर, टियर गैस यूनिट, बज्र वाहन आदि सहित अन्य फोर्स तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त पूरा क्षेत्र 7 ड्रोन कैमरे की निगरानी में रहेगा।
