October 23, 2026

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रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू विवाद पर CM धामी का सवाल, बोले- 22 साल बाद ही आरोप क्यों?

देहरादून। उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़ा विवाद लगातार चर्चा में है। घरेलू हिंसा के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला अब भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि यदि दोनों 22 वर्षों तक साथ रहे, तो इतने लंबे समय तक आरोप सामने क्यों नहीं आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पर आरोप लगने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता और मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी।

22 अक्टूबर को बीजेपी मुख्यालय में CM धामी ने दी प्रतिक्रिया

22 अक्टूबर को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रेखा आर्य और उनके पति के बीच चल रहे विवाद को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद अचानक गंभीर आरोप सामने आने के पीछे क्या परिस्थितियां हैं, यह जांच का विषय है।मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी या दोषी ठहराना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी और कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वायरल ऑडियो में नाम आने से कोई दोषी नहीं हो जाता

मुख्यमंत्री धामी ने वायरल ऑडियो और बातचीत में लोगों के नाम सामने आने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी बातचीत में किसी व्यक्ति का नाम लिए जाने से यह साबित नहीं होता कि वह संबंधित मामले में शामिल है। बातचीत के दौरान किसी का भी नाम लिया जा सकता है, इसलिए केवल ऑडियो या सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के आधार पर किसी को दोषी मानना सही नहीं है।उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच आवश्यक है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही कानून के तहत निर्णय लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक लाभ के लिए आरोपों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी विवाद को राजनीतिक लाभ लेने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को दोषी मानने का आधार केवल आरोप नहीं, बल्कि जांच में सामने आए तथ्य और कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए।उन्होंने निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मामले की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

रेखा आर्य ने पति के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पति पर घरेलू हिंसा, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस प्रकरण से जुड़े कुछ ऑडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए, जिन्हें रेखा आर्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया था।हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।

गिरधारी लाल साहू ने लगाए करीब 200 करोड़ रुपये के आरोप

रेखा आर्य की शिकायत के बाद उनके पति गिरधारी लाल साहू ने भी एक वीडियो जारी कर पलटवार किया। उन्होंने अपनी पत्नी पर करीब 200 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इन आरोपों ने मामले को और अधिक राजनीतिक तूल दे दिया है। इस तरह पति-पत्नी के बीच शुरू हुआ विवाद अब घरेलू हिंसा के आरोपों, वायरल ऑडियो और कथित भ्रष्टाचार के दावों के कारण राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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