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आखिर कब होगा कल्याणी नदी का कल्याण ?

जगदीश चन्द
रूद्रपुर। शहर के बीच से गुजर रहीकल्याणी नदी शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। आलम यह है कि अतिक्रमण कारियों ने जहां नदी को नाले के रूप में तब्दील कर दिया है वहीं रही सही कसर नदी में डाली जा रही गंदगी ने पूरी कर दी है। जगतपुरा से लेकर रविन्द्रनगर धोबीघाट और भूतबंगला तक कल्याणी नदी गंदगी से पटी हुई है जिसके चलते जीवन देने वाली यह नदी अब महामारी फैलाने की स्थिति में नजर आ रही है। एक समय था जब कल्याणी नदी रूद्रपुर की लाईफ लाईनी मानी जाती थी। इस नदी के प्रति शहर के लोग श्रद्धाभाव रखते थे शायद यही वजह थी कि इस नदी को ‘कल्याणी’ नाम दिया गया। इस नदी से जहां शहर के लोग प्यास बुझाते थे वहीं इसमें होने वाले खनन से हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता था। दो दशक पहले तक कल्याणी नदी के तट पर नहाने धोने से लेकर अन्य कामकाज के लिए लोगों का हुजूम उमड़ता था। नदी के पानी को लोग पीने के लिए भी उपयोग में लाते थे। गर्मियों के दिनों में तो सुबह से शाम तक इस नदी में अटखेलियां करते नजर आते थे। गर्मियों के दिनों में जब अटरिया मंदिर में जब मेला लगता था तो श्रद्धालु कल्याणी में श्रद्धा की डुबकी लगाने के बाद मां अटरिया देवी के दर्शन के लिए जाते थे। कई मायनों में यह नदी शहरवासियों के लिए वरदान मानी जाती थी। लेकिन जैसे जैसे रूद्रपुर शहर में आबादी बढ़ी वैसे वैसे कल्याणी नदी के बुरे दिन शुरू हो गये। सिडकुल की स्थापना के बाद तो कल्याणी नदी का स्वरूप ही बिगड़ गया। कल्याणी नदी के किनारे बस्तियों में रह रहे लोगों ने धीरे धीरे कल्याणी नदी पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया और यह सिलसिला लगातार आज भी जारी है। आलम यह है कि कई लोगों ने तो कल्याणी नदी में ही पीलर गाढ़कर अपने मकान बना लिये हैं जिससे कई जगहों पर कल्याणी का रूख ही मुड़ गया है। कल्याणी नदी पर अतिक्रमण की होड़ अटरिया मंदिर क्षेत्र से ही शुरू हो जाती है। नदी के आस पास जब मकान बने तो तभी से कल्याणी नदी में कूड़ा डालने की परम्परा भी शुरू हो गयी। यही नहीं सीवेज पाईप भी लोगों ने नदी में ही निकालने शुरू कर दिये। घरों का कूड़ा और गंदा पानी भी कल्याणी नदी में ही जा रहा है। जिसके चलते कल्याणी का स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है। आज शहर से सटे इलाकों में कल्याणी नदी गंदगी से पूरी तरह पटी पड़ी है। कल्याणी नदी का सबसे बुरा हाल जगतपुरा में है। जगतपुरा में कल्याणी नदी पर अवैध कब्जों के साथ साथ यहां के वांशिदों ने घरों का कूड़ा नदी में डालकर पूरी नदी को ही ट्रंचिंग ग्राउण्ड का रूप दे दिया है। हालत यह है कि जगतपुरा में नदी का पानी तो कहीं नजर ही नहीं आता। अब तो लोग इसमें मरे हुए जानवर भी डालने लगे हैं जिससे भीषण दुर्गंध के कारण लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। नदी में जहां तहां गंदगी ही नजर आ रही है। स्वच्छता अभियान को लेकर भले ही प्रदेश के साथ साथ इस जिले में भी बड़े बड़े दावे हो रहे हों लेकिन कल्याणी नदी की हालत देखकर जरा भी नहीं लगता कि पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान का यहां कोई असर हुआ हो। शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते आज कल्याणी नदी अपना अस्तित्व तो खो ही रही है साथ ही इसमें समां रही गंदगी से आज महामारी फैलन का खतरा भी पैदा हो रहा है। जल्द ही कल्याणी नदी की हालत सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं हुए तो इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
कल्याणी की सेहत सुधारने के दावे खोखले साबित
रूद्रपुर। कल्याणी नदी की हालत सुधारने को समय समय पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने बड़े बड़े दावे किये हैं शासन की ओर से भी विलुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए योजना बनाई गई थी लेकिन कल्याणी नदी के मामले में सारी योजनाएं और दावे हवाई साबित हो रहे हैं। पूर्व में मेयर सोनी कोली और उससे पहले चेयरमैन मीना शर्मा ने भी कल्याणी की धारा को निर्मल बनाने के लिए वायदे किये थे। लेकिन कल्याणी की सेहत सुधारने के लिए अभी तक कोई ठोस प्रयास धरातल पर नजर नहीं आये। प्रशासन को कल्याणी नदी की याद बर्षात के दिनों में तब आती है जब नदी उफान पर आने लगती है। प्रशासन बर्षात के मौसम में अतिक्रमणकारियों को चेतावनी भी देता है लेकिन बारिश खत्म होते ही सब कुछ अपने ढर्रे पर चलने लगता है। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने भी विलुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए योजना तैयार की थी इस योजना से भी अभी तक कल्याणी नदी के कल्याण के लिए कोई काम शुरू नहीं हो पाया है।
छठ पूजा पर ही आती है कल्याणी नदी की याद
रूद्रपुर। यह बड़ी विडम्बना है कि प्रशासन को तो कल्याणी नदी से कोई खास सरोकार नही है लेकिन शहर के लोग भी कल्याणी नदी को सिर्फ अपने मतलब के लिए याद करते हैं। आम तौर पर वर्ष पर कल्याणी नदी का प्रयोग कचरा डालने के लिए ही किया जाता है। सफाई के लिए इस नदी की याद नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को छठ पूजा के समय ही आती है। दरअसल जगतपुरा, रविन्द्रनगर और भूतबंगला में कई स्थानों पर कल्याणी नदी के तट पर छठ पूजा घाट बने हुए हैं। इन छठ पूजा घाटों में बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा के लिए आते हैं। छठ पूजा के लिए नगर निगम प्रशासन नदी की सफाई जरूर कराता है वह भी सिर्फ छठ पूजा घाटों के आस पास। बाकी जगहों पर कल्याणी नदी को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। कल्याणी नदी की जितनी चिंता प्रशासन और शहर लोगों को छठ पूजा के समय होती है उतनी चिंता पूरे वर्ष की जाये तो शायद कल्याणी नदी की स्थिति कुछ सुधर सकती है।
कल्याणी की हालत सुधारने को होगा आंदोलनः कालड़ा
रूद्रपुर। वार्ड 39 आवास विकास जगतपुरा क्षेत्र के पार्षद रमेश कालड़ा जगतपुरा में कल्याणी नदी की दयनीय हालत को लेकर खासे चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जगतपुरा क्षेत्र के अधिकांश लोग कल्याणी नदी में कूड़ा डालकर इसे प्रदूषित कर रहे हैं। कचरा डालने से कल्याणी नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। इसके लिए कल्याणी नदी के आस पास बसे लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कल्याणी नदी के पास रह रहे लोगों को खुद कल्याणी नदी में गंदगी डालने से बचना होगा और दूसरों को भी इसके लिए रोकना होगा तभी हम कल्याणनी नदी का अस्तित्व बचा पायेंगे। श्री कालड़ा ने कहा कि कल्याणी नदी की वृहद स्तर पर सफाई की आवश्यकता है। इसके लिए वह नगर निगम बोर्ड में आवाज उठायेंगे और जरूरत पड़ी तो वार्डवासियों को साथ में लेकर आंदोलन भी करेंगे।

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