मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, सोशल मीडिया पर साझा किया पत्र
पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष और सीजेपी समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने की थी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
नई दिल्ली: नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा पत्र साझा करते हुए इसकी जानकारी दी। विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों ने शुरुआत से ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अपने फैसले पर अड़ी रही। दिल्ली में सीजेपी ने पिछले 20 जून से आंदोलन जारी रखा था। इसी बीच सरकार और सीजेपी के बीच प्रस्तावित तीसरे दौर की वार्ता से पहले उनके इस्तीफे की खबर सामने आई है। अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होती है। उन्होंने देश के युवाओं की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का सम्मान व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार भी जताया।नीट-यूजी परीक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। साथ ही परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई। नीट विवाद को लेकर पिछले कई सप्ताह से देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे थे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की बात कह रहे थे।
कई राज्यों में छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किए
नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। 20 जून से दिल्ली के जंतर मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों ने पेपर लीक के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक समेत कई छात्र छात्राओं ने भूख हड़ताल कर केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने और सरकार से जवाबदेही की मांग की। वहीं सरकार के मंत्रियों से कई दौर की वार्ता हुई। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से सख्त कदम उठाने का संदेश दिया । साथ ही पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के साथ ही संसद से सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, जून में सामने आए पेपर लीक मामले के बाद देशभर के छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न छात्र संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। सरकार पर परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में विफल रहने के आरोप लगाए गए। नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पहले से जारी है। मामले को लेकर कई कानूनी कार्रवाइयाँ भी चल रही हैं। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए यह कदम आवश्यक था।


