February 12, 2026

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तो भाजपा के ‘सात महारथी’ तय करेंगे ‘सत्ताइस के समर’ की दिशा ?

उम्रदराज विधायकों को चुनाव में उतारने को लेकर बीजेपी में मंथन शुरू,प्रदेश अध्यक्ष ने दिए सत्तर पार वाले नियम को शिथिल करने के संकेत
देहरादून। सूबे में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी मिशन हैट्रिक पूरा कर पाएगी या नहीं ? यह काफी हद तक भाजपा के सात बुजुर्ग विधायकों पर निर्भर करेगा। उपरोक्त सातों भाजपा विधायक पिछले कई चुनाव से लगातार अपनी विधानसभा सीट जीतते चले आने के कारण पार्टी के सात स्तंभ माने जाते हैं। ये सातों विधायक सत्ताइस के विधानसभा चुनाव में सत्तर वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। लिहाजा, राजनीतिक प्रेक्षकों की नजर अब इस पर है कि नियमों एवं सिद्धांतों वाली सियासत के लिए जानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी सत्ताइस के समर को जीतने के लिए अपने सत्तर पार वाले नियम को शिथिल करती है या नहीं। जाहिर है कि अगर भारतीय जनता पार्टी ने टिकट वितरण मेंअपने सत्तर पार वाले नियम को लागू किया तो बीजेपी के सात बुजुर्ग विधायक सत्ताइस का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे ।ऐसी स्थिति में भाजपा को बुजुर्ग विधायकों की विधानसभा सीट पर किसी नए चेहरे को चुनाव में उतरना होगा जो कि भाजपा की दृष्टि से अच्छा खासा रिस्की हो सकता है और भाजपा का मिशन सत्ताइस खतरे में पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी में ऐसा कोई बंधानकारी नियम नहीं है कि कोई राजनेता सत्तर वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चुनाव नहीं लड़ सकता, लेकिन पार्टी के भीतर ऐसी आवाजें जब तब उठती ही रहती है कि सत्तर वर्ष की आयु पुरी करने के बाद राजनेता को सक्रिय राजनीति से विश्राम दे दिया जाना चाहिये। लिहाजा, भाजपा में इन सातों बुजुर्ग विधायकों और उनकी विधानसभा सीट को लेकर मंथन आरंभ हो चुका है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सत्तर साल की उम्र पार कर चुके इन विधायकों में से कई उम्र का हवाला दे कर अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं ,मगर भाजपा हाईकमान एक भी सीट पर रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में उम्र का हवाला दे रहे नेताओं को भी चुनाव के लिए तैयार रहने को भी कहा जा रहा है। सब से बड़ी वजह यह है कि ये विधायक पिछले कई सालों से अपने-अपने क्षेत्र में चुनाव जीतते आ रहे हैं। सत्ताइस के विधानसभा चुनाव में भाजपा के जिन बुजुर्ग विधायकों की उम्र सत्तर से अधिक हो जाएगी ,उनमें नैनीताल जिले के कालाढूंगी से विधायक बंशीधर भगत, पिथौरागढ़ जिले डीडीहाट से विधायक बिशन सिंह चुफाल, पौड़ी गढ़वाल जिले के चौबट्टðाखाल से विधायक सतपाल महाराज, देहरादून जिले के रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ, देहरादून जिले के कैंट से विधायक सविता कपूर, अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर से विधायक मोहन सिंह मेहरा और नैनीताल जिले के रामनगर से विधायक दीवान सिंह बिष्ट प्रमुख हैं। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सत्ताइस के विधानसभा चुनावों के टिकट वितरण के लिए पार्टी की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।उनके अनुसार भाजपा में टिकटों का निर्धारण केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड करता है। हमारा काम हर सीट पर ऐसे चेहरों की तलाश करना है जिनके जीतने की सर्वाधिक संभावना है। पार्टी ने 2027 के चुनावों में जीत का लक्ष्य रखा है और उसी के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।भट्ट ने बताया कि विधानसभा चुनावों से पहले कराए जा रहे सर्वे में प्रत्याशियों की उम्र को लेकर भी फीडबैक लिया जा रहा है। खासकर ऐसे मौजूदा विधायकों को लेकर सवाल किए जा रहे हैं जो खुद की बजाय परिवार में किसी के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी का पूरा फोकस जिताऊ चेहरे पर है। अगर बुजुर्ग विधायकों के संबंध में पॉजिटिव फीडबैक आया तो एक बार फिर इन्हीं पर दांव लगाया जा सकता है।

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