February 11, 2026

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प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान नाटकीय अंदाज में भुल्लर के आवास पहुंचे भाजपा विधाायक अरविंद पांडे

गदरपुर। बुक्सा जनजाति समाज की भूमि को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच बुधवार को उस समय राजनीतिक तापमान और बढ़ गया, जब यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर की प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान भाजपा विधायक अरविंद पांडे अचानक उनके आवास पर पहुंच गए। विधायक की इस अप्रत्याशित मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को नाटकीय मोड़ दे दिया और मौके पर मौजूद पत्रकारों, कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय लोगों की निगाहें उन्हीं पर टिक गईं। प्रेस वार्ता के दौरान भुल्लर जहां भाजपा विधायक के पुत्र पर जनजाति समाज की तीन एकड़ भूमि को कथित रूप से जालसाजी से हथियाने और बाद में बेचने के गंभीर आरोप लगा रहे थे, वहीं ठीक उसी समय विधायक अरविंद पांडे का वहां पहुंचना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। दोनों नेताओं के आमने सामने आने से कुछ देर के लिए माहौल में सन्नाटा पसर गया, हालांकि बाद में दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया। पांडे ने भुल्लर को अपना छोटा भाई बताते हुए औपचारिक बातचीत की, जिससे किसी प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति तो नहीं बनी, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेस अचानक सुर्खियों में आ गई। विधायक के पहुंचते ही पत्रकारों ने उनसे तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए। मीडिया कर्मियों ने पूछा कि क्या वे अपने ऊपर और अपने पुत्र पर लग रहे आरोपों को देखते हुए ही प्रेस कॉन्फ्रेस स्थल पर पहुंचे हैं। इस पर अरविंद पांडे ने आरोपों से किसी प्रकार के पूर्व ज्ञान से इनकार करते हुए सफाई दी। उन्होंने कहा कि वे उस मार्ग से गुजर रहे थे और रास्ते में छोटे भाई भुल्लर के नए मकान को देखकर रुक गए। पांडे ने बताया कि यहां भीड़ देख उन्हें यह आभास हुआ कि शायद आज भवन का कोई शुभारंभ कार्यक्रम हो रहा है, इसलिए वे वहां चले आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें यूथ कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेस की कोई जानकारी नहीं थी। विधायक ने कहा कि वह भुल्लर को छोटे भाई जैसा मानते हैं। इसी भावना के चलते वे वहां रुक गए। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक टकराव के इरादे से कार्यक्रम में शिरकत नहीं की, बल्कि केवल पारिवारिक और सामाजिक शिष्टाचार के तहत वहां पहुंचे थे। पांडे के इस बयान के बाद भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। यूथ कांग्रेस की प्रेस वार्ता के बीच भाजपा विधायक की इस अचानक मौजूदगी को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भूमि विवाद को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में गदरपुर की राजनीति और अधिक गरमा सकती है।

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