दिग्गज नेताओं ने की संयुक्त प्रेस वार्ता : विधानसभाओं में गूँजेगा कांग्रेस के संघर्ष का शोर,16 फरवरी को राजभवन का घेराव करेंगे
प्रदेश सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते हुए आंदोलनकारी खाका पेश किया
देहरादून (उद संवाददाता)। उत्तराखंड की सियासत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। राजधानी स्थित कांग्रेस भवन में पार्टी के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व सीएम हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत आदि दिग्गज नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता कर प्रदेश सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते हुए अगले तीन महीनों का विस्तृत आंदोलनकारी खाका पेश किया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगामी तीन माह तक राज्य की प्रत्येक विधानसभा में स्थानीय जन-समस्याओं को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाएगी और धरना-प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार की चूलें हिलाने का काम करेगी। इसी रणनीति के तहत आगामी 16 फरवरी को कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता देहरादून की सड़कों पर उतरकर राजभवन का घेराव करेंगे। कांग्रेस की इस चुनावी और रणनीतिक घेराबंदी को धार देते हुए चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कार्यकर्ताओं का आ“वान किया कि वे गांव-गांव और घर-घर जाकर सरकार की विफलताओं का चिट्टा खोलें। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज भ्रष्टाचार की दीमक ने राज्य की नींव को खोखला कर दिया है, जिससे उत्तराखंड के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। उन्होंने प्रदेश में लगातार बढ़ रहे महिला अपराधों पर भी गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कानून- व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और वरिष्ठ विधायक प्रीतम सिंह ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ चुका है और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रदेश के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार केवल प्रोपेगेंडा का सहारा ले रही है, जबकि धरातल पर बेरोजगारी और महंगाई ने विकराल रूप ले लिया है। कांग्रेस का यह तीन महीने का सघन अभियान न केवल कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूँकने का काम करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे मुद्दों को जन-आंदोलन में बदलकर सरकार को बैकफुट पर लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।



