February 4, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

उत्तरांचल दर्पण एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा 2027 का विधानसभा चुनाव !

देहरादून। खबर पक्की है लेकिन भाजपा के एक खेमे के लिए हताशा भरी है। पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थको और चाहने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी के समान है। उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इस खघ्बर से भले ही दिल्ली बैठकर उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने को ताना बाना बुन रहे नेताओं के पैरों तले जमीन खिसक जाए,मगर खबर पक्की है।उत्तराखंड की राजनीति में बीते कुछ समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहा है। सत्ता गलियारों तक तरह-तरह की चर्चाएं चलीं, सोशल मीडिया पर संभावनाओं के कयास लगाए गए और कुछ पुराने बयानों व घटनाओं को जोड़कर नए नए राजनीतिक समीकरण गढ़े गए। लेकिन इन तमाम चर्चाओं के बीच अब जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, वह यह हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी टिकाऊ है और पूरी तरह सुरक्षित है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मुख्यमंत्री धामी के कामकाज से संतुष्ट है। संगठन और सरकार के स्तर पर हुए आकलन में धामी सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, कानूनदृव्यवस्था, विकास परियोजनाओं और राजनीतिक संतुलन को सकारात्मक माना गया है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर यह संदेश स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण पर नियंत्रण, चारधाम यात्र प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे फैसलों को धामी सरकार की बड़ी उपलब्धियों के तौर पर देखा गयाहै। केंद्र सरकार की कई प्रमुख योजनाओं को जमीन पर उतारने में भी राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका रही है। इन सबने मुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। हालांकि, भीतरखाने असंतोष की चर्चाएं भी समय-समय पर उठी। कुछ नेताओं के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा गया, लेकिन संगठन ने इन अटकलों को सिरे से ही खारिज किया। सूत्रें का कहना है कि भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र के तहत विचारदृविमर्श चलता रहता है, मगर इसका मतलब नेतृत्व बदलना नहीं होता। दिल्ली में हालिया बैठकों के बाद साफ संकेत हैं कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने का कोई एजेंडा नहीं है। उलटे संगठन अब सरकार और मुख्यमंत्री के काम काज को जनता के बीच और मजबूती से रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। जिलों में संगठनात्मक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और सरकार की उपलब्धियों को लेकर प्रचार को तेज करने की योजना बनाई जा रही है। राजनीतिक इंजीनियरों की मानें तो धामी के पक्ष में सबसे बड़ा कारक उनका अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व, तेज निर्णय क्षमता और केंद्र के साथ बेहतर तालमेल होने के साथ साथ प्रदेश के हर क्षेत्र में जनता से सीधी पकड़ है। पहाड़ी राज्य की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने जिस तरह से प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखा, उसे पार्टी हाईकमान सकारात्मक रूप में देख रहा है। कुल मिलाकर,तमाम अफवाहों और सियासी शोर- शराबे के बीच फिलहाल तस्वीर साफ है- उत्तराखंड में न तो धामी जावत है और न ही कोई आवत है।यानी कि भाजपा आगामी चुनावों में धामी को ही अपना चेहरा बनाएगी। इस खबर से जहां धामी के समर्थको और चाहने वालों के चेहरे खिल जाएंगे लेकिन पिछले काफी समय से भाजपा के भीतर उत्तराखंड के मुख्य मंत्री बनने का सपना देख रहे दिग्गजों के लिए यह किसी बहुत बड़े धक्के से कम नहीं है। वहीं सूत्रें की मानें तो सरकार और पार्टी के विरोध में काम करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा।कुल मिलाकर, नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है। शीर्ष नेतृत्व के भरोसे, संगठनात्मक समर्थन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्थितिमजबूत मानी जा रही है। संकेत साफ हैं कि 2027 के चुनाव में भाजपा उत्तराखंड में किसी नए चेहरे की तलाश नहीं कर रही, बल्कि धामी के नेतृत्व को ही आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *