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भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को मिली राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने विवादित वीडियो हटाने का दिया आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रामक प्रचार पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम का नाम इस मामले से जोड़ने वाले तमाम वीडियो और कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। जस्टिस मिनी पुष्करणा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित उपयोगकर्ता इसे नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं इन वीडियो को ब्लॉक या डिलीट करें। सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को जानबूझकर इस संवेदनशील मामले में घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले की लंबी जांच और ट्रायल के दौरान कभी भी दुष्यंत गौतम का नाम सामने नहीं आया। यहाँ तक कि ट्रायल कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों को उम्रकैद की सजा भी दे चुकी है। भाटिया ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के अकाउंट्स के माध्यम से एक झूठा नैरेटिव तैयार कर याचिकाकर्ता की पिछले 40 वर्षों की बेदाग राजनीतिक छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। दुष्यंत गौतम ने अपनी याचिका में बताया कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें उन्हें अंकिता मामले से जोड़कर अनर्गल आरोप लगाए गए। याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह ‘फेक न्यूज’ की श्रेणी में आता है और इसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा है। गौरतलब है कि इस मामले में हाल ही में एक वीडियो क्लिप सामने आई थी, जिसमें उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के बयानों का हवाला दिया गया था। हालांकि, बाद में सुरेश राठौर ने स्पष्ट किया था कि वह वीडियो क्लिप ‘एआई’ ;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसद्ध द्वारा निर्मित थी और उन्हें व उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए जारी की गई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में भी यदि ऐसा कोई कंटेंट दोबारा अपलोड किया जाता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तत्काल इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दें ताकि वे आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। बता दें कि इस दुष्प्रचार को लेकर उत्तराखंड पुलिस भी सक्रिय है और उर्मिला सनावर व सुरेश राठौर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है। बता दें सितंबर 2022 में ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में 19 वर्षीया रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया था कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर एक ‘वीआईपी’ मेहमान को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया था। इस मामले में पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को कोर्ट पहले ही उम्रकैद की सजा सुना चुका है। अब राजनीतिक गलियारों में उस ‘वीआईपी’ के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच दुष्यंत गौतम ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए अपने नाम के दुरुपयोग पर यह रोक लगवाई है।

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