February 13, 2026

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नदियों के किनारे हजारों की संख्या में अवैध रूप से बाहर से आकर बस गए लोग

देहरादून। उत्तराखंड राज्य में भागौलिक दृष्टि से 71प्रतिशत क्षेत्र में जंगल भूमि है, जहां सबसे ज्यादा अवैध रूप से अतिक्रमण कारी बसे हुए है, सरकार द्वारा एक सर्वे करवाया गया है जिसमे बताया गया है कि 11814 हेक्टेयर वन भूमि पर बाहर से आए लोगो ने कब्जा किया हुआ है । सर्वे में ये बताया गया कि जिन 23 नदियों में खनन होता है वहां नदी श्रेणी की वन भूमि पर कब्जे किए गए है, दरअसल यहां 2005 तक खनन के लिए श्रमिक बाहरी प्रदेशों से जब आते थे और बरसात में खनन बंद होने के बाद वापिस चले जाते थे।किंतु कांग्रेस शासन काल में ये लोग यहां स्थाई रूप से कच्चे पक्के मकान बना कर बस गए और अब इस कब्जे वाली जगह के सौदे होने लग गए, इस सौदे बाजी को राजनीतिक संरक्षण मिला और अब यहां अवैध बस्तियां जनसंख्या असंतुलन, मुस्लिम तुष्टिकरण का कारण बन गई है। गंगा तीर्थ नगरी में कुम्भ क्षेत्र को छोड़ दिया जाते तो पूरा जिले में हरी चादर फैल गई है। हरिद्वार जिले में गंगा, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिले में गौला,कोसी नदी, देहरादून जिले में टोंस, यमुना, कालसी, रिस्पना, नौरा, अमलावा आदि नदियों के किनारे हजारों की संख्या में अवैध रूप से बाहर से लोग आकर बस गए है पुलिस इन दिनों इनका सत्यापन करवा रही है। मुस्लिम गुर्जरों के कब्जेः उत्तराखंड में कॉर्बेट और राजा जी दो टाइगर रिजर्व है, जहां से मुस्लिम गुर्जरों को सरकार ने बाहर निकाल कर,प्रत्येक परिवार को एक एक हैक्टेयर जमीन दी थी, किंतु इन गुर्जरों ने हिमाचल और यूपी से अपने रिश्तेदार बुलाकर बड़े पैमाने पर सैकड़ो हैक्टेयर जमीन कब्जा ली और उसपर खेती करने लगे अब जब सर्वे में इस प्रकरण का खुलासा हुआ तो मालूम हुआ कि तराई पश्चिम पूर्वी वन प्रभाग, देहरादून और हरिद्वार वन प्रभाग में हजारों एकड़ जमीन इन गुर्जरों ने कब्जा ली और फिर खरीद फरोख्त का कारोबार भी करने लगे। इसमें कई राजनीतिक और वनाधिकारियों के संरक्षण के विषय भी सामने आए, लेकिन सीएम धामी ने स्पष्ट कर दिया कि कोई दबाव नहीं है और उन्हे जंगल बिल्कुल अतिक्रमण मुक्त चाहिए,उन्होंने कहा कि पुराने चले आ रहे गोट खत्ते आबादी को छोड़ कर एक एक इंच सरकारी जमीन खाली करवाई जाएगी। वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए अभी तक तीन हजार एकड़ से ज्यादा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करवा लिया है। शेष पर कारवाई चल रही है। वन विभाग ने कालागढ़ में रामगंगा जल विद्युत परियोजना और )षिकेश में आईडीपीएल को लीज पर दी अपनी जमीन को भी वापिस लिए जाने का काम शुरू किया है।

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