February 11, 2026

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उत्तराखंड में सभी जिलों के मेडिकल स्टोरों से लिए जा रहे हैं कफ सिरप के सैंपल : एफडीए

बाहरी राज्यों से भेजे गए 30 सैंपल फेल,11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए हानिकारक है दवा
देहरादून। कफ सिरप को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच उत्तराखंड में खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफडीए सतर्क हो गया है। सोमवार को एफडीए की ओर से प्रेस वार्ता कर प्रदेशभर में चल रही छापेमारी की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जगह-जगह मेडिकल स्टोरों से सैंपल लिए जा रहे हैं और उन्हें जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। एफडीए ने खुलासा किया कि बाहरी राज्यों से भेजे गए 30 सैंपल फेल पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि उत्तराखंड में अब तक इस श्रेणी की कोई प्रतिबंधित दवा सप्लाई नहीं हुई है। इसके बावजूद सतर्कता बरतते हुए क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया गया है और देहरादून और रुद्रपुर में दो विशेष लैब स्थापित की गई हैं। के अधिकारियों ने कहा कि यह दवा 11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है। इसी को देखते हुए एफडीए ने डॉक्टरों से अपील की है कि बच्चों को ऐसी प्रतिबंधित दवाएं बिल्कुल भी न लिखें। बता दें सभी जिलों में थ्क्। की छापेमारी जारी है। साथ ही इस मामले में बच्चों के माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में यह अभियान हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद शुरू किया है। एफडीए की संयुक्त टीमें प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों पर छापे मारे। दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए।पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है।केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह, सही खुराक और न्यूनतम अवधि के लिए ही इनका उपयोग किया जा सकता है। सरकार ने विशेष रूप से Deñtromethorphan युक्त सिरप और Chlorpheniramine Maleate $ Phenylephrine Hydrochloride संयोजन वाली दवाओं को चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया है।

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