‘नन्ही परी’ को न्याय दिलाने के लिए आगे आए ‘सीएम धामी’
भड़कती जन भावनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के दिए निर्देश
देहरादून। वर्ष 2014 में पिथौरागढ़ निवासी 7 वर्षीय बच्ची नन्ही परी के हल्द्वानी के शीशमहल स्थित रामलीला ग्राउंड से एक विवाह समारोह के दौरान गायब होने तथा 6 दिनों बाद मासूम का शव गौला नदी से बरामद होने पर गैंगरेप एवं हत्या की पुष्टि होने से संबंधित अपराधिक प्रकरण में मौत की सजा पाए मुख्य आरोपी अख्तर अली के सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद, उत्तराखंड वासियों में बढ़ रहे गुस्से एवं जनता के गुस्से को सरकार के खिलाफ मोड़ने की कांग्रेसी कोशिश के बीच ,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मासूम पीड़िता नन्ही परी को इंसाफ दिलाने के लिए राज्य के सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करने के निर्देश न्याय विभाग को दिए हैं ।नन्ही परी मामले में आरोपित को सुप्रीम कोर्ट से दोषमुत्तफ़ किए जाने का संज्ञान लेते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश की बेटियों के साथ दरिंदगी करने वालों को सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, लिहाजा न्याय विभाग को इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दािखल करते हुए, मजबूत पैरवी के साथ सजा सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस केस को मजबूती से लड़ेगी और इसकी पैरवी के लिए अच्छी से अच्छी लीगल टीम को लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देवभूमि में इस तरह के कुकृत्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। न्याय की इस लड़ाई में सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि ऐसे असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए सरकार लगातार प्रदेश में सत्यापन अभियान चला रही है।सरकार देवभूमि की अस्मिता पर कोई चोट नहीं पहुंचने देगी। ज्ञात हो कि उपरोत्तफ़ मामले में आरोपित को लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट से मौत की सजा हो चुकी थी, लेकिन कानून की तकनीकी खामियों का लाभ उठाते हुए आरोपित अब सुप्रीम कोर्ट से बरी हो चुका है। मासूम से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से अभय दान मिलने के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा था और लोग जगह-जगह पर मासूम पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए कैंडल मार्च निकालने लगे थे। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लोगों में बढ़ती नाराजगी को सरकार की ढुलमुल पैरवी से जोड़कर सरकार के खिलाफ नाराजगी का वातावरण तैयार कर, अपनी राजनीतिक रोटी सेकने की कोशिश में थी, मगर मुख्यमंत्री धामी ने समय रहते मामले पर संज्ञान लेकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। जहां तक नन्ही परी से संबंधित प्रकरण के घटनाक्रम का सवाल है ? तो उपरोत्तफ़ घटना 20 नवंबर 2014 की है। दरअसल, पिथौरागढ़ की रहने वाली सात साल की श्नन्हीं परीश् अपने परिवार के साथ हल्द्वानी के शीशमहल स्थित रामलीला ग्राउंड में एक शादी समारोह में आई थी। समारोह के दौरान ही नन्हीं परी अचानक से लापता हो गई थी।परिजनों ने नन्ही परी को काफी ढूंढा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया। करीब 6 दिन बाद नन्हीं परी का शव गौला नदी से मिला। पुलिस ने बच्ची का पोस्टमार्टम कराया तो पता चला कि हत्या से पहले मासूम के साथ गैंगरेप किया गया था। इस घटना से लोगों के मन में काफी गुस्सा था।पुलिस ने नन्हीं परी का शव मिलने के करीब आठ दिन बाद मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। उसकी निशानदेही पर दो और आरोपियों प्रेमपाल और जूनियर मसीह को भी पकड़ा गया था। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को गैंगरेप और हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। प्रेमपाल को पांच साल की सजा दी गई। वहीं तीसरे आरोपी को बरी कर दिया। अक्टूबर 2019 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले को बरकरार रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट से मुख्य आरोपी बरी हो गया है। इसी को लेकर लोगों के मन में रोष पढ़ने लगा था और कांग्रेस पार्टी इसका राजनीतिक लाभ लेने के फिराक में थी।
