सत्ता संरक्षित गुंडागर्दी से ‘छोटी हुई’ बीजेपी की बड़ी जीत : मूक दर्शक बन रहे जिम्मेदार महकमे
जिला पंचायत की कुछ सीटों पर प्रशासन के सामने जमकर उड़ाई गई कानून की धज्जियां
नैनीताल। जैसा कि अनुमान था, भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की 12 जिला पंचायत सीटों में से 10 सीटों पर कब्जा कर लिया है, जबकि राजधानी देहरादून की जिला पंचायत सीट कांग्रेस भाजपा से छीनने में सफल रही है ।शेष बची जिला पंचायत नैनीताल सीट पर भी ,भारतीय जनता पार्टी का कब्जा सुनिश्चित करने के सारे इंतजाम स्थानीय प्रशासन लगभग कर ही चुका है। बशर्ते, कि आगामी 18 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई में नैनीताल हाई कोर्ट नैनीताल जिला पंचायत सीट पर दोबारा मतदान का आदेश पुनः न दे दे । देखा जाए तो अब तक घोषित नतीजो में जिला पंचायत की 10 सीटों पर जीत हासिल करना भाजपा की दृष्टि से एक बड़ी जीत है, मगर कुछ जिला पंचायत की कुछ सीटों पर जीत के लिए भाजपा द्वारा अपनाए ओछे हथकंडे एवं भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा सरेआम की गई बेखौफ गुंडागर्दी एवं इस गुंडागर्दी पर पुलिस प्रशासन की खामोशी ने भाजपा की इस बड़ी एवं खास जीत को बेहद छोटा एवं आम बना दिया है। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतने के लिए सत्ताधारी दल के लोगों द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न जिला पंचायत क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्यों एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों को न केवल डराया धमकाया गया, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी धमकी देकर आतंकित किया गया। कुछ स्थानों पर तो जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों को मुकदमे में फंसा देने तक की धमकी भी दी गई। इसके अलावा जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों को विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रलोभन देकर अपनी निष्ठा बदलने के लिए तो मजबूर किया गया ही। जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा राज्य के विभिन्न हिस्सों में खुलेआम अंजाम दी गई गुंडागर्दी की तमाम घटनाओं के बीच, नैनीताल की हिंसक घटनाओं ने प्रदेश भर में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी। नैनीताल में जिला पंचायत चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा न केवल नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य एवं हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश तथा पूर्व विधायक संजीव आर्य के साथ झूमाझटकी की गई, बल्कि मतदान के लिए पहुंचे नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के साथ मारपीट करते हुए कांग्रेस समर्थित पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण भी कर लिया गया। इस दौरान नैनीताल का जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सारे घटनाक्रम को केवल मूक दर्शक बना देखता रहा, जिससे व्यथित होकर कांग्रेसी नेता तत्काल नैनीताल उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचे ।कांग्रेस प्रत्याशी के अधिवक्ता के अनुरोध पर नैनीताल हाई कोर्ट ने नैनीताल जिला अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को अगवा किए गए जिला पंचायत सदस्यों को बरामद करने का आदेश दिया तथा अगवा किए गए सदस्यों को उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय तक बरामद करने में असफल रहने पर नैनीताल जिलाधिकारी से जवाब तलब किया। तब जिलाधिकारी की ओर से दोबारा मतदान करने की संस्तुति करने का प्रस्ताव दिया गया ,जिस पर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सहमति व्यक्त की और मामले की सुनवाई 18 अगस्त को नियत कर दी। उच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद यह माना जा रहा था कि अब नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव दोबारा होगा, मगर नैनीताल के जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान की अवधि समाप्त होने के बाद मतगणना करा ली और उच्च न्यायालय का आगामी आदेश आने तक परिणाम की घोषणा रोक दी। उधर इस तमाम घटनाक्रम के अगले दिन कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता एवं तमाम प्रमुख कार्यकर्ता एसपी कार्यालय जा धमके और धरना प्रदर्शन करते हुए अगवा किए गए कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की बरामदगी की मांग करने लगे। धरने के बीच एसपी सिटी प्रकाश चंद्र मौके पर पहुंचे और बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पा नेगी की तहरीर पर नौ नामजद और कुछ अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है तथा लापता सदस्यों को खोजने के लिए विशेष टीम भी गठित कर दी गई है ।कांग्रेस नेता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे और एसएसपी से पुनः वार्ता की।एसएसपी ने कांग्रेस नेताओं को भरोसा दिलाया कि रात 12 बजे तक सभी लापता जिला पंचायत सदस्य सकुशल अपने घर पहुंच जाएंगे। हैरत की बात है कि रात 12 बजे के पहले ही लापता जिला पंचायत सदस्यों का एक वीडियो सामने आ गया, जिसमें उन्होंने स्वयं का अपहरण न होने और इकट्टòे घूमने जाने की बात कही है। यहां पर यह बताना आवश्यक है कि उपरोक्त जिला पंचायत सदस्यों से जिला पंचायत कार्यालय के सामने मारपीट करते हुए उन्हें बलपूर्वक ले जाने के तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे ,मगर उपरोक्त सदस्य घटनाक्रम को अब कुछ अलग ही एंगल देने का प्रयास कर रहे हैं। बताने की जरूरत नहीं कि इस समूचे खेल के पीछे सत्ता में बैठे महारथियों का ही हाथ है और सत्ता के दबाव में ही पुलिस और प्रशासन भाजपा के एजेंट की तरह काम करते हुए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप करते हुए नजर आ रहे हैं। बहरहाल सभी निगाहें अब नैनीताल उच्च न्यायालय में 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर है ।इस सुनवाई के बाद ही निश्चित हो पाएगा कि नैनीताल जिला पंचायत चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा।
