February 13, 2026

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कांग्रेस कार्यालय के स्वामित्व को लेकर रामनगर में देर रात तक चला बवाल

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी रामनगर में डाला डेरा
रामनगर। रानीखेत रोड स्थित कांग्रेस कार्यालय के स्वामित्व को लेकर यहां देर रात तक बवाल हुआ। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी देर शाम रामनगर में डेरा डाल लिया और पुलिस के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच जाम लगा रहे कांग्रेसियों पर पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया। बता दें वर्तमान में कांग्रेस कार्यालय पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत की देखरेख में संचालित हो रहा है। सोमवार सुबह दस बजे यहां कार्यालय स्वामी नीरज अग्रवाल पहुंचे और कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। सूचना कांग्रेसियों तक पहुंची तो कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और हंगामा खड़ा हो गया। उन्होंने कार्यालय के गेट पर अपना ताला लगा दिया। सूचना पर भारी संख्या में पहुंची पुलिस ने कार्यालय में कांग्रेसियों का लगाया ताला तोड़ दिया। इसी बात पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं व पुलिस की बीच तीखी झड़प हो गई। इस दौरान जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। आरोप है कि दू्सरे पक्ष ने कार्यालय के बाहर लगी कांग्रेस की फ्रलैक्सी हटाकर पोस्टरों पर कालिख पोत दी। इसको लेकर विवाद और गहरा गया और कार्यालय के बाहर पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। सूचना पर शाम को धरने में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन सिंह माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदेश, विधायक काजी निजामुद्दीन और जसपुर विधायक आदेश चौहान सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी भी पहुंच गये। कांग्रेस कार्यालय में कब्जे को लेकर पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत और उनके समर्थकों का पुलिस के साथ जमकर विवाद हुआ। समर्थकों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारे लगाए। पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत का कहना है कि सुबह उन्हें सूचना मिली थी कि कांग्रेस कार्यालय के गेट पर लगे उनके ताले को तोड़कर किसी अन्य व्यक्ति ने नए ताले लगा दिए है। सूचना पर वह मौके पर पहुंचे और अपने पुराने ताले वापस लगवाए, लेकिन इसके तुरंत बाद भारी संख्या में पुलिस बल वहां पर पहुंच गई।पूर्व विधायक रणजीत रावत ने दावा किया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कहा कि कार्यालय के अंदर कुछ लोग बंद है। विधायक के मुताबिक कार्यालय उनका है और घटना के वक्त अंदर कोई भी उनका व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बावजूद पुलिस ने ताला तोड़ दिया। कहा कि सबकी मौजूदगी में पुलिस ने ताला तोड़ा है, जो इस बात का प्रमाण है कि पुलिस प्रशासन इस कार्यालय पर कब्जा कराने में शामिल है। पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी किया, जिसमें कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं। कार्यालय को लेकर सोमवार सुबह शुरू हुआ घमासान मंगलवार रात 2 बजे तक जारी रहा। इस बीच ब्लॉक प्रमुख और पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के पुत्र विक्रम रावत ने मीडिया को बताया कि एक व्यक्ति से हल्की झड़प के बाद पुलिस मौके की तलाश में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस पहले से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला करने की रणनीति के साथ तैयार बैठी थी। उन्होंने कहा,जैसे ही उन्हें मौका मिला, पुलिस ने गुंडों की तरह हमला किया और जो सामने आया, उसे लाठियों से पीटा गया। विक्रम रावत ने दावा किया कि वह अपने भाई के साथ एक तरफ खड़े थे लेकिन उन पर भी लाठियां बरसाई गईं, जिससे वह घायल हो गए,उनके अनुसार, कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी इस लाठीचार्ज में घायल हुए हैं। वहीं पूर्व सैनिक और कांग्रेस कार्यकर्ता देशबंधु रावत ने बताया कि वह कार्यालय के बाहर शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे,उसी समय एक कार को पार्किंग को लेकर समझाने की कोशिश की गई, लेकिन तभी पुलिस ने हमला बोल दिया,उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, कोतवाल अरुण कुमार सैनी और एसआई अनीश अहमद ने जानलेवा हमला किया, शरीर पर कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं बचा जहाँ चोट न लगी हो। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के इशारे पर कांग्रेस कार्यालय पर कब्जा कराया गया। उन्होंने कहा,यह सब एक सोची-समझी रणनीति है,जिससे विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके,पुलिस की पूरी भूमिका संदिग्ध हैं उन्होंने आरोप लगाया कि,जो लाठीचार्ज किया गया वह बिना किसी वैधानिक आदेश के किया गया,कई कार्यकर्ताओं के सिर फटे, हाथ टूटे और गंभीर चोटें आईं। यह पूरी तरह से सिविल मामला था, जिसे बातचीत से सुलझाया जा सकता था, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर हिंसा को बढ़ावा दिया। करण माहरा ने सवाल किया कि जब प्रदर्शन में कोई महिला मौजूद नहीं थी, तो पुलिस ने महिला कांस्टेबलों को अंदर क्यों तैनात किया? उन्होंने दावा किया कि यूपी से असामाजिक तत्वों को बुलाकर कार्यालय में बिठाया गया है और उनकी सुरक्षा में पुलिस लगाई गई है। करण माहरा ने मांग की कि जिन लोगों ने कब्जा किया है,और जो लोग अंदर मौजूद है उनका सत्यापन किया जाए, यह देखा जाए कि कहीं उनके पास हथियार तो नहीं हैं और क्या वे पहले किसी अपराध में लिप्त रहे हैं,उन्होंने कहा कि यह एक निजी विवाद था, जिसे कोर्ट से हल किया जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि कार्यालय में धारा 145 लगाकर स्थिति को यथावत किया जाए और संदिग्ध लोगों को बाहर निकाला जाए,साथ ही चेतावनी दी कि जब तक कांग्रेस की मांगे पूरी नहीं होतीं, पार्टी कार्यकर्ता धरने से नहीं हटेंगे। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है और इसे आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाने का संकेत भी दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पार्टी कार्यकर्ता इस घटना के विरोध में एकजुट होते दिख रहे हैं।

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