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शिक्षकों के पेंशन फंड में करोड़ों का गोलमाल

– संजीव सुखीजा-
गदरपुर, 18 सितम्बर। अंशदायी पेंशन योजना से आच्छादित सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों की एनपीएस योजना के अंतर्गत वर्ष 2006 से वर्ष 2011 तक वेतन से काटी गई धनराशि आज तक शिक्षकों के प्रान(परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नम्बर) खातों में विभाग द्वारा जमा नहीं की गई है। वार्ड नं0-3, सकैनिया रोड गदरपुर निवासी देवराज पुत्र स्व- हजारा राम द्वारा 12 अप्रैल 2016 को सूचना का अधिकार अधिनियम से मांगी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है, जिसमें शिक्षकों के पेंशन फंड में करोडों रुपए का घोटाला होने की आशंका जताई जा रही है, साथ ही सूचना आयोग की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा है, क्योंकि लंबे समय से चल रही सुनवाई में आयोग द्वारा द्वारा 9 अगस्त 2017 को अपीलार्थी को सूचना दिलवाने में दिया गया निर्णय भी पक्षपात पूर्ण प्रतीत हो रहा है। वर्ष 2005 में सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर नवीन पेंशन योजना एनपीएस को अपनाया गया था परंतु एनपीएस के सम्बंध में नियमों की अस्पष्टता के कारण अधिकारियों द्वारा वर्ष 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों के वेतन की 10 प्रतिशत धनराशि की कटौती कर एक्सिस बैंक रुद्रपुर के खाते में वर्ष 2011 तक जमा की जाती रही। वर्ष 2010 में प्रान(परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नम्बर)खाते खोले गए, जिसमें वेतन का 10 प्रतिशत कर्मचारी का तथा 10 प्रतिशत सरकार का अंश जमा किए जाने लगा, परंतु वर्ष 2006 से वर्ष 2011 तक की धनराशि जिला स्तर पर खोले गए खातों में जमा धनराशि को शिक्षकों के प्रान खातों में जमा नहीं किया गया। शिक्षकों के पैंशन फंड की धनराशि एक्सिस बैंक के जिस पीएलए खाते में जमा की गई है। बैंक द्वारा उस धनराशि पर नाममात्र का ब्याज दिया जा रहा है जबकि शिक्षकों के पेंशन फंड की धनराशि करोड़ों रुपए की है। प्रान खाते में धनराशि जमा न हो पाने के पीछे एक बड़ी वजह शिक्षकों के वेतन से काटी गई धनराशि का विवरण विभाग द्वारा सुरक्षित नहीं रखा गया है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के वेतन आहरण वितरण अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) थे परन्तु वेतन की धनराशि जिला परियोजना अधिकारी सर्व शिक्षा अभियान उधमसिंहनगर द्वारा चेक द्वारा उपलब्ध कराई जाती थी, परंतु वेतन का वितरण जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से किया जाता था, तथा वेतन बिल उप खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रेषित किया जाता था। विभागीय लापरवाही की इंतहा तो यह रही कि वेतन से काटी गई धनराशि का विवरण न तो उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सुरक्षित रखा गया, न ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सुरक्षित रखा गया, जबकि उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रत्येक शिक्षक की सेवा से जुड़े समस्त विवरण सुरक्षित रखे जाते हैं। अंशदायी पेंशन योजना की पासबुक प्रत्येक शिक्षक द्वारा कार्यालय में जमा की गई थी, जिसे कार्यालय द्वारा अद्यतन नहीं किया गया जबकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थित विभागीय लेखा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी आनंद सिंह बिष्ट के पास वेतन बिल उपलब्ध है, परंतु वह शिक्षकों की पेंशन की धनराशि का विवरण उपलब्ध नहीं करा रहे हैं तथा विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। शिक्षकों द्वारा इस प्रकरण को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के सम्मुख भी प्रस्तुत किया गया है, जिसके सम्बंध में अरविंद पांडे द्वारा विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है, परंतु अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद मामला अटका हुआ प्रतीत हो रहा है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आदेश उनके ग्रह जनपद के अधिकारियों के लिए बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं हो रहे हैं, क्योंकि विभागीय अधिकारियों द्वारा शिक्षकों द्वारा लंबे समय से की जा रही इस मांग पर आज तक की गई कार्यवाही शून्य नजर आ रही है। विभागीय अपील का निर्णय आने के पश्चात उत्तराखंड सूचना आयोग में धारा 19(3)के अंतर्गत द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई, जो सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत की पीठ द्वारा सुनी गई। प्रथम सुनवाई के समय सूचना आयुक्त द्वारा इस मामले में राज्य स्तर पर निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया तथा विभागीय अधिकारियों को सूचना उपलब्ध कराने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी(बेसिक) तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी उधम सिंहनगर को सभी उप शिक्षा अधिकारियों की बैठक बुलाकर तत्काल कार्यवाही का निर्देश दिया गया, परंतु लंबे समय तक सुनवाई जारी रहने के उपरांत सूचना आयोग द्वारा दिया गया अंतिम निर्णय भी पक्षपात पूर्ण प्रतीत होता है, जो कि अपीलार्थी सूचना दिलाने में नाकाम सिद्व हुआ है।

विभाग द्वारा मामले की जांच करायी जा रही है, और जल्द ही त्रुटियों को दुरूस्त कर वेतन से काटी गई धनराशि को शिक्षकों के खातों में समायोजित कर दिया जायेगा।
-रवि मेहता, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), उधमसिंहनगर

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