February 14, 2026

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मेला प्रशासन के अधिकारी बैरागी कैंप पहुंचे,संतों ने की तुरंत भूमि आवंटित करने की मांग

हरिद्वार। बैरागी कैंप क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने और सुविधा का मामला मुद्दा बनता जा रहा है। गुरुवार को कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत, कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल एवं अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह सहित मेला प्रशासन के अन्य अधिकारी बैरागी कैंप पहुंचे। साथ ही अखिल भारतीय श्री पंच निर्माेही अणि अखाड़े में तीनों वैष्णव अखाड़ों के श्रीमहंतों से भूमि आवंटन और कुंभ मेले की व्यवस्थाओं पर चर्चा की। इस दौरान श्रीपंच निर्माेही अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की उदासीनता के चलते भूमि आवंटन एवं अन्य कार्य बैरागी कैंप में नहीं हो पाए थे। जिस कारण बैरागी संतों के शिविर अब तक नहीं लग पाए। अब मेला प्रशासन को बाहर से आने वाले संतों के लिए शिविर, बिजली, पानी, शौचालय की व्यवस्था सुचारू रूप से करनी चाहिए, ताकि कुंभ मेला भव्य रूप से संपन्न हो सके। कहा कि बैरागी संत और खालसे के हरिद्वार पहुंचने पर उनको तुरंत भूमि चिर्ििंत कर आवंटित की जाए, जिससे जल्द से जल्द बैरागी संत अपने टेंट शिविर लगा सकें। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन को शाही स्नान एवं बैरागी अखाड़ों की पेशवाई के लिए सड़कों की व्यवस्था को ठीक करना चाहिए और मेला क्षेत्र में बिजली के खंभों की व्यवस्था भी करनी चाहिए। श्रीपंच निर्वाणी अणि अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि बैरागी कैंप क्षेत्र में रोजाना पानी का छिड़काव किया जाए। संपूर्ण मेला क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर जमीन का स्तर बराबर किया जाए। ताकि टेंट शिविर लगाने में संतों को सुविधा मिल सके। श्रीपंच दिगंबर अणि अखाड़े के श्रीमहंत राम किशन दास नगरिया महाराज ने कहा सुविधा मुहैया कराने में मेला प्रशासन पहले ही देरी कर चुका है। अब सभी मूलभूत सुविधाएं 10 दिन के अंदर प्रदान करनी चाहिए। मेलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि तीनों वैष्णव अखाड़ों को भूमि आवंटन का कार्य जारी है। साथ ही सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल ने कहा कि सभी संत-महापुरुष हमारे पूज्यनीय हैं। संतों की सेवा के लिए वे 24 घंटे तत्पर हैं। इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत रामशरणदास, महंत रामजीदास, महंत रामकिशोर दास शास्त्री, महंत मनीष दास, महंत भगवानदास खाकी, महंत मोहनदास खाकी अन्य संत मौजूद रहे।

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