February 14, 2026

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उत्तराखंड कांग्रेस पर बरसे हरीश रावत,गुटबाजी पर खड़े किये गंभीर सवाल!

पार्टी के अधिकारिक पोस्टरों में मेरा नाम और चेहरा स्थान नहीं पा पाया, मैंने कोई सवाल खड़ा नहीं किया!
देहरादून(दर्पण ब्यूरो)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आगामी 2022 के चुनाव से पूर्व प्रदेश कांग्रेस संगठन के नेताओं की आपसी गुटबाजी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये है। इतना ही नहीं पूर्व सीएम हरदा ने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी समेत प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के बयान के बाद सोमवार और मंगलवार को सोशल मीडिया पर पहली बार कांग्रेस के लिये सीएम का चेहरा घोषित करने मांग उठाने के बाद अब बुधवार को एक बार फिर प्रदेश आलाकमान की रणनीति पर पलटवार किया है। बहरहाल प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने अब तक पूर्व सीएम हरीश रावत के फार्मूले पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। माना जा रहा है कि गढ़वाल दौरे पर गये प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह अब वरिष्ठ नेताओं को एकजुट करने के लिये बैठक बुलाकर रणनीति तय कर सकते है। पूर्व सीमए ने नेता प्रतिपक्ष डा- इंदिरा द्वारा पार्टी की परम्परा के अनुरूप बहुमत के बाद ही सीएम का चेहरा बनाये जाने के बायान के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। श्री रावत ने कांग्रेस में गुटबाजी को स्वीकार करने के साथ ही पार्टी के लिये सीएम का चेहरा घोषित करने के मुददे पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश व प्रीतम सिंह की घेराबंदी करते हुए लिखा है कि मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित होने को लेकर खुलकर संकोच कैसा? यदि मेरे सम्मान में यह संकोच है तो मैंने स्वयं अपनी तरफ से यह विनती कर ली है कि जिसे भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया जायेगा मैं, उसके पीछे खड़ा हूंगा। रणनीति के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है कि हम रुभाजपा द्वारा राज्यों में जीत के लिये अपनाये जा रहे फार्मूले का कोई स्थानीय तोड़ निकालें। स्थानीय तोड़ यही हो सकता है कि भाजपा का चेहरा बनाम रकांग्रेस का चेहरा, चुनाव में लोगों के सामने रख जाय ताकि लोग स्थानीय सवालों के तुलनात्मक आधार पर निर्णय करें। मेरा मानना है कि ऐसा करने से चुनाव में हम अच्छा कर पाएंगे, फिर रुसामूहिकता की अचानक याद क्यों? जो व्यत्तिफ़ किसी भी निर्णय में, इतना बड़ा संगठनात्मक ढांचा है पार्टी का, उस ढांचे में कुछ लोगों की संस्तुति करने के लिए भी मुझे एआईसीसी का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, उस समय सामूहिकता का पालन नहीं हुआ है और मैंने उस पर कभी आवाज नहीं उठाई है, पार्टी के अधिकारिक पोस्टरों में मेरा नाम और चेहरा स्थान नहीं पा पाया, मैंने उस पर भी कभी कोई सवाल खड़ा नहीं किया! यहां तक की मुझे कभी-कभी मंचों पर स्थान मिलने को लेकर संदेह रहता है तो मैं, अपने साथ अपना मोड़ा लेकर के चलता हूं ताकि पार्टी के सामने कोई असमंजस न आये तो आज भी मैंने केवल असमंजस को हटाया है, तो ये दनादन क्यों?

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