February 12, 2026

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नौकरशाहो के बाद चर्चा में आये बड़े सफेदपोशों के नाम!!!

देहरादून,4 अगस्त। नेशनल हाईवे 74 मुआवजा घोटाले में दो आईएएस अधिकारियों को नोटिस दिये जाने के बाद इस घोटाले में लिप्त सफेदपोश नेताओं के नाम भी उजागर होने की सम्भावना बढ़ गई है। भूमि मुआवजा घोटाले में शामिल सफेदपोश नेताओं को लेकर जनता के बीच जमकर कानाफूंसी हैं। उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा भूमि अधिग्रहण मुहावजा घोटाला राज्य में ही नही देश में भी सुर्खियो में है। अब दो आईएएस अधिकारियों का नाम सामने आने के बाद जीरो टोलरेंस की बात करने वाले प्रदेश की भाजपा सरकार भी अग्नि परीक्षा से गुजर रही है। एसआईटी टीम द्वारा शासन को भेजी जांच रिपोर्ट में दो आईएएस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाने के बाद कार्मिक विभाग ने उन्हे नोटिस तो भेज दिया है, यदि सरकार द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय इस पर लीपापोती की जाती है तो सरकार की जीरो टोलरेंस नीति पर ही प्रश्नचिन्ह लग जायेगा।गत दिवस कार्मिक विभाग ने दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें अपना पक्ष देने के लिए एक सप्ताह का मौका दिया गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है उसके आधार पर अनियमिताओं में लिप्त अधिकारियों को नोटिस दिये गये हैं और उन्हें सात दिन के भीतर जबाब देने का मौका दिया गया है। एनएच 74 घोटाले में बैकडेट से कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर लगभग 500 करोड़ रूपए का घोटाला किया गया था।मामले की जांच रूद्रपुर एस आईटी ने की है। एसआईटी ने उच्चाधिकारियों द्वारा आर्बिटेशन में भारी अनियमितताएं बरते जाने को लेकर गोपनीय रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय से सीधा मुख्य सचिव को भेजी है। एसआईटी ने तत्कालीन जिला अधिकारी और आर्बिट्रेटर पंकज पांडे और चन्द्रेश यादव के आर्बिट्रेशन के फैसलों पर सवाल खड़ा करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि नैसर्गिक न्याय के तहत दोनों अधिकारी अपना पक्ष जांच एजेंसी के सामने रख सकते हैं। तत्कालीन डीएम पांडे और यादव के आर्बिट्रेशन न्यायालय में 16 वाद दायर हुए थे जिनमें से 13 में तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह और तीन में अनिल शुक्ला ने अभिनिर्णय आदेश पारित किये थे। इन्हीं मामलों में अनियमितता के साक्ष्य मिलने पर एसआईटी ने करीब 425 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है और इस मामले में उन्हें अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। भूमि मुआवाजा घोटाले की जांच में एसआईटी को आर्बिट्रेशन में गये कुछ मामलो में संलिप्तता मिली थी। सूत्रें की मानें तो जांच के बाद एसआईटी के सामने इस बात का खुलासा हुआ कि तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह की ओर से किच्छा तहसील में 13 ऐसे मामलों में अभिनिर्णय आ देश पारित किये गये थे जिनमें कृषि भूमि को अकृषि दर्शाकर मुआवजा निर्धारण किया गया था। तत्कालीन डीएम पंकज पांडे के आर्बिट्रेशन न्यायालय में इन मामलों के वाद दायर हुए थे जिन्हें उन्होंने सही बताया था। इसी आधार पर 10करोड़ से अधिक का मुआवजा भी वितरित किया गया था। वहीं घोटाले की अवधि में ही जिलाधिकारी रहे चन्द्रेश यादव के आर्बिट्रेशन न्यायालय में भी तत्कालीन एसएलओ अनिल शुक्ला की ओर से पारित काशीपुर तहसील के तीन मामले गये इनमें भी सरकारी भूमि को निजी दर्शाकर करीब 2-25करोड़ का मुआवजा निर्धारित किया गया था। निर्णय संशोधित करने के बाद करीब 7-5करोड़ का मुआवजा निर्धारित हो गया था लेकिन मुआवजा बांटा नहीं गया। बहरहाल भूमि मुहावजा घोटाले में प्रदेश के दो आईएएस अफसरों के नाम आने के बाद अब सफेदपोश नेताओं के नाम खुलने का क्षेत्र की जनता को बेसब्री से इंतजार है। अब देखना यह है भूमि मुआवजा घोटाले में शामिल सफेदपोश नेताओं के नाम सामने आते भी है या नही।

काशीपुर,बाजपुर,गदरपुर और सितारगंज में हुआ अधिक घोटाला
देहरादून,4 अगस्त। नेशनल हाईवे 74 के लिये अधिग्रहण की गई भूमि मुआवजा घोटाले के अधिकांश मामले काशीपुर,बाजपुर,गदरपुर और सितारगंज तहसील से जुड़े हुये हैं। इन तहसील से जुड़े भूमि अधिग्रहण मुआवजा के मामले में जमकर भ्रष्टाचार हुआ था। एसआईटी टीम द्वारा की गई जांच में भी इन तहसील में ही अधिक खामिया पाई गई। आर्बिट्रेशन न्यायालय में हुये विवादित मामले भी इन्ही तहसील से जुड़े हुये है। काशीपुर,बाजपुर,गदरपुर और सितारगंज तहसील के कई काश्तकारों द्वारा भूमि अधिग्रहण के मामले में लिया गया अधिक मुआवजा तक जमा करा दिया गया है और कई पैसा जमा कराने की तैयारी में जुटे हुये है। अभी कुछ दिन पूर्व ही काशीपुर के एक काश्तकार द्वारा 15 लाख रूपया सरकारी खाते में जमा कराया गया है।

घोटाले में लिप्त सफेदपोश नेताओं के नामों को लेकर चर्चाए जोरों पर
देहरादून।नेशनल हाईवे 74 के भूमि मुआवजा घोटाले में जहां एक ओर अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी तो वही सफेदपोश नेता भी इसमें शामिल थे। लेकिन अभी तक किसी भी सफेदपोश नेता का नाम सामने नही आया है जो जनता के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।क्षेत्रीय जनता का मानना है कि विपक्ष भी कई बार सफेदपोश नेताओं के नाम उजागर करने की मांग कर चुका है लेकिन शासन इस मामले में चुप्पी साधे हुये है। विपक्ष का इशारा किस नेता की ओर है यह बात जनता भी जानती है और सरकार भी। लेकिन सरकार इस मामले में पूरी तरह से खामोश है। साक्ष्यों के अभाव में एसआईटी की जांच भी सफेदपोश नेताओं तक नही पहुंच पा रहीं अब लोगों को उम्मीद है कि यदि आईएएस अधिकारी अपने बयान में सफेदपोश नेताओं के नाम खोल दे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

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