February 14, 2026

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बेअंत सिंह
केलाखेड़ा। विकास पुरूष पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी के प्रयासो से अस्तित्व मे आये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा लगभग चार वर्षों से चिकित्सक विहीन चल रहा है । लगभग 40 गांव की करीब 70हजार जनसंख्या को चिकित्सा प्रदान करने वाले चार बेड़ांे के इस अस्पताल का मानो कोई तारणहार नहीं है।

विगत काफी वर्षों से चिकित्सक विहीन चल रहे इस अस्पताल की जिम्मेदारी एक फार्मासिस्ट के कंधों पर है। मजे की बात ये है कि यह फार्मेसिस्ट भी सप्ताह में मात्र 3 दिन ही यहां का कार्यभार देखते है, इनकी मूल तैनाती बन्नाखेड़ा में है। सरकारी उपेक्षा के चलते यहां अब तक किसी भी चिकित्सा अधिकारी को स्थाई रूप से नियुक्त न किए जाने से यहां के मरीजों को उपचार न मिल पाने के कारण अन्य शहरों को पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां चिकित्सक की स्थाई नियुक्ति न होने के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियो द्वारा पूर्व में मुख्य चिकित्साधिकारी उधम सिंह नगर को भी मौखिक रूप से विरोध कर चिकित्सक की स्थाई नियुक्ति की मांग की जा चुकी है, परंतु सरकार की उपेक्षा तथा संबंधित विभाग की घोर लापरवाही के चलते यहां चिकित्सक की स्थाई नियुक्ति करना तो दूर स्थाई फार्मासिस्ट तक नहीं मिल पाया है। यहां चिकित्सक की स्थाई नियुक्ति न होने के कारण गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है, वर्तमान में यहा एक फार्मासिस्ट तथा संविदा पर तैनात किए गए आयुष विंग के एक चिकित्सक की तैनाती है। क्षेत्र के लोगों में शासन तथा संबंधित विभाग के विरु( आक्रोश पनप रहा है। लोगों में एक बार फिर इस सरकारी अस्पताल में स्थाई रूप से चिकित्सक की तैनाती की मांग को लेकर चिंगारी सुलगने लगी है।
स्थाई चिकित्सक की तैनाती को लेकर धरनाकेलाखेड़ा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थाई चिकित्सक का पद वर्षाे से रिक्त होने के चलते स्थाई चिकित्सक की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तहसील गेट पर धरना दे दिया है। मदर टेरेसा फाउंडेशन अध्यक्ष अकरम खान की अगुवाई में तहसील गेट पर सुबह 10बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना दिया गया कहा कि जल्द ही मांगों को पूरा नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री पाण्डे भी नहीं दिला पाये राहत
केलाखेड़ा। वर्तमान में भाजपा सरकार को उत्तराखण्ड में अस्तित्व मे आये हुए साढे तीन वर्ष की अवधि पूर्ण हो चुकी है तथा गदरपुर विधान सभा से चुने गये विधायक वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार ने बतौर कैबिनेट मंत्री अपनी सेवाएं दे रहे हंै। परंतु मंत्री जी ने भी कभी इस सुलगती हुई जनससमया की ओर अपना ध्यान आकर्षित नही किया । जिससे यह माना जा रहा है कि कहीं यह वोटो की राजनीति का मसला तो नही है। ज्ञात हो कि केलाखेडा नगर राजनैतीक करण रूप से वोटरो का रूझान कांग्रेस के प्रति अधिक है। वही दूसरी ओर शिक्षा मंत्री ने चुनाव जीतने के बाद धन्यवादी दौरो में एक दो सभाओ में सार्वजनिक रूप से सबका साथ सबका विकास का नारा बडे जोर शोर से लगाया था। परंतु साढे तीन वर्ष की सरकार मंे केलाखेडा नगर को स्थाई चिकित्सक मिलना तो दूर फार्मसिस्ट भी सप्ताह में तीन दिन के लिए सेवांए दे रहे है। इससे सरकार का का सबका साथ सबका विकास का नारा धरातल पर कितना दिखाई दे रहा है इसके लिए प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नही है।

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