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नजूल भूमि पर मालिकाना हक के लिए सीएम को सौंपा ज्ञापन

भराणीसैंण(उद सहयोगी)। नजूल भूमि पर मालिकाना हक दिलाये जाने की मांग को लेकर आज रूद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को ज्ञापन सौंपा। दिये ज्ञापन में विधायक ठुकराल ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख नगरों विशेष रूप से जनपद उधाम सिंह नगर के जिला मुख्यालय में हजारों परिवार पिछले चा लीस वर्षों से नजूल भूमि पर निवास कर रहे हैं। इन परिवारों को मालिकाना हक देने के लिए रूद्रपुर और किच्छा की जनसभाओं में सार्वजनिक रूप से घोष्ज्ञणा भी की जा चुकी है। उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा सरकार की नजूल नीति को खारिज करने के उपरांत सरकार द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल की गयी थी जिसके बाद नजूल भूमि पर निवास कर रहे नागरिकों को हमारी सरकार की वजजह से सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिली है। परंतु हाईकोर्ट द्वारा उत्तराखण्ड सरकार की नजूल नीति को निरस्त कर दिये जाने से नजूल नीति अस्तित्व में नहीं है इस अवस्था में हमारी सरकार नजूल भूमि पर वर्षों से निवास कर रहे इन हजारों उपेक्षित नागरिकों को पट्टा मालिकाना हक कैसे देगी यह चिंता का विषय हैं। ज्ञापन में विधायक ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा सर्वोन्न न्यायालय में इस संदर्भ में पूर्व में दखिल एसएलपी के साथ ही इससे संदर्भित एक प्रार्थना पत्र इस आशय से दाखिल किया जाना चाहिए कि उत्तराखण्ड सरकार को पुनः नजूल नीति बनाये जाने का सुप्रीम कोर्ट से अधिकार मिल सके। ताकि उपेक्षित असहायों व निर्धनों को उनकेे स्वामित्व में उनकी भूमि को फ्रीहोल्ड किया जा सके व आपके द्वारा की गयी घोषणा व हमारी सरकार का वादा भी पूर्ण हो सके। विधायक ठुकराल ने आगे कहा कि इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा दिल्ली की तर्ज पर व्यापक योजना बनाकर उत्तराखण्ड में नजूल भूमि पर वर्षों से निवास कर रहे नागरिकों को अध्यादेश लाकर उन्हें मालिकाना हक प्रदान कर सकतते हैं। विधायक ने कहा कि सरकार द्वारा व्यापक सर्वेक्षण व जांच पड़ताल कर नजूल भूमि पर आवासीय रूप से वर्षों से निवास कर रहे कब्जाधारकों को उनके स्वामित्व में फ्रीहोल्ड करने हेतु न्यूनतम दरों पर उनकी भूमि का मालिकाना हक प्रदान कर पट्टे प्रदान कर दे तो यह व्यापक जनहित में होगा तथा उत्तरा खण्ड सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी। विधायक ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि यदि नजूल भूमि पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक नहीं दिया गया तो वह वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

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