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विकास के लिये जरूरी है एनडी तिवारी जैसा विजन

रूद्रपुर,(उद संवाददाता)। नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, विधानसभा अथवा लोकसभा के चुनाव हों तो जनता इस उद्देश्य से अपने जनप्रतिनिधियों का चयन करती है कि उनके क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा और उन्हें सभी वह मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी जो जनता का हक होता है। लेकिन यदि मूलभूत सुविधाओं से ही जनता वंचित रह जाये और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान न दें तो फिर यह प्रश्न खड़ा हो जाता है कि उन्होंने अपने जनप्रतिनिधि को चुनने में कोई गलती तो नहीं कर दी। क्योंकि विकास की सोच रखने से ही विकास कार्यो को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। लेकिन उत्तराखण्ड में भले कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा कोई भी जनता की अपेक्षाओं पर खरी नही उतरी है। यदि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 नारायण दत्त तिवारी का कार्यकाल को छोड़ दिया जाये तो अन्य सभी मुख्यमंत्रियों का कार्य काल जनता की नजरों में उपेक्षित ही रहा है। उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण जिन अपेक्षाओं के साथ किया था आज तक कोई भी सरकार इस पर खरी नही उतरी है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विकास पुरूष से सुशोभित पूर्व मुख्यमंत्री पं- नारायण दत्त तिवारी ने अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखण्ड राज्य के विकास के लिये जो गाथा लिखी थी उसे आज भी विस्मृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रूद्रपुर और हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना की थी। हालांकि उस समय सिडकुल बनने के बाद कुछ विरोध के स्वर उठे थे लेकिन सिडकुल बनने के बाद जिस प्रकार से देश की नामी गिरामी कम्पनियों ने अपने यहां उद्योग स्थापित किये और राज्य ही नहीं वरन देश भर के विभिन्न हिस्सों से आये लोगों को यहां रोजगार मिला तो उत्तराखंड राज्य का नाम भी देश के मानचित्र पर अंकित हो गया। सिर्फ सिडकुल ही नहीं पूर्व सीएम तिवारी ने रूद्रपुर में मेडिकल कालेज की भी स्थापना की थी और उनका प्रयास था कि रूद्रपुर में 300 बेड का मेडिकल कालेज बनाया जाये ताकि राज्य के युवा मेडिकल शिक्षा से भी जुड़ सकें। इसके अलावा उन्होंने राज्य के विकास के लिए अनेकों योजनाएं प्रारम्भ कीं जिसका लाभ राज्य की जनता को मिला। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान तराई में ही नही बल्कि पहाड़ों में भी सड़कों जाल बिछवाया गया। उनके समय ही प्रदेश में सबसे ज्यादा सड़के बनी थी। उत्तराखण्ड में बाहर से आने वाले लोग यहां हो रहे विकास कार्यो की खुल कर तारीफे किया करते थे  लेकिन सरकार बदली, सत्ता बदली तो मानों विकास का रास्ता भी बदल गया। भाजपा सरकार आते ही मेडिकल कालेज का सपना सिर्फ सपना बनकर रह गया और किसी भी जनप्रतिनिधि ने मेडिकल कालेज बनने के लिए आवाज नहीं उठायी। सिडकुल में भी 400 से अधिक उद्योग स्थापित हुए थे लेकिन कांग्रेस और भाजपा सरकार की उपेक्षा के चलते आज कई उद्योग बंद हो चुके हैं ंऔर कई बंदी के कगार पर हैं। जिन युवाओं को यहां रोजगार मिला था अब वह पुनः बेरोजगारी के मुहाने पर खड़े हैं। रूद्रपुर में सडकुल की स्थापना हुई थी तो ऐसा प्रतीत होता था कि रूद्रपुर की गिनती भी अब देश के उन शहरों में होने लग जायेगी जो विकासशील शहरों की श्रेणी में आते हैं लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। यह जनप्रतिनिधियों की इच्छा शक्ति का अभाव रहा अथवा उनके भीतर विकास कार्य करने की शक्ति नहीं थी जिस कारण आज भी रूद्रपुर शहर उसी स्थान पर खड़ा है जहां यह आज से 20- 25 वर्ष पूर्व होता था। शहर की मुख्य समस्याएं सड़क, नाली, बिजली, पानी से भी आज लोग जूझ रहे हैं। क्षेत्र में भाजपा का विधायक और प्रदेश में भी भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी यदि क्षेत्रवासियों को मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़े तो इससे अधिक शर्म की बात क्या हो सकती है।

 

 

भाजपा में नहीं है विकास कराने की इच्छाशक्तिःबेहड़

रूद्रपुर। पूर्व स्वास्थ्यमंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि भाजपाईयों में विकास कार्य कराने की इच्छाशक्ति ही नहीं है। क्योंकि उन्हें बिना विकास कार्य कराये ही चुनाव में जनता के वोट मिल जाते हैं। ऐसे में उन्हें विकास कार्य कराने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यदि विकास कार्य को कराने से वोट मिलते तो भाजपाईयों को इस बात का एहसास होता कि क्षेत्र का विकास कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने मेडिकल कालेज को अधर में लटका दिया और  उसका निर्माण कराने में कोई जहमत नहीं उठायी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज के मुख्यमंत्री विरोधी रहे हैं क्योंकि सीएम का मानना है कि मेडिकल कालेज के नाम पर कृषि भूमि को खत्म किया गया है तो ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इस मेडिकल कालेज का निर्माण कराना भाजपा के वश की बात नहीं। उन्होंने कहा कि सिडकुल से तमाम फैक्ट्रियां पलायन कर रही हैं। पिछले एक माह से अशोका लेलैंड फैक्ट्री में उत्पादन बंद है। उनका कहना है कि कई आटोमोबाइल कम्पनियां बंद होने के कगार पर हैं। लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनाव के चलते उन्हें जबरन चलाया ताकि यह मुद्दा न बन सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए अब जनता को ही आगे आना होगा क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अनेक विकास कार्य कराये लेकिन अब जनप्रतिनिधि इस ओर रूचि नहीं रख रहे और वह अकेले ही क्षेत्र के विकास को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन अब जनता को उठ खड़ा होना होगा।

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