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थैरेपी से घर पर ही जटिल रोगों का ईलाज संभवः डा0 पीयूष

रूद्रपुर। नुचेरोपैथी की अलग अलग थैरेपी से अब घर बैठे ही जटिल रोगों का ईलाज संभव हैं।यह कहना है कि नेचुरापैथी से पीएचडी डा0 पीयूष सक्सेना कहा। डा0 सक्सेना बीती शाम सिटी क्लब में ‘अपना इलाज अपने हाथ’ विषय पर आयोजित स्वास्थ्य सेमिनार में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने सेमिनार में उपस्थित लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जरूरी टिप्स दिये। साथ ही लीवर क्लीजिंग, किडनी क्लींज, एसिडिटी क्लींज थैरेपी के बारे में विस्तार से जानकारी दी और पूछे गये सवालों का जवाब देकर लोगों की शंकाओं का समाधान भी किया। डा0 सक्सेना ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण पैरसाइट और बिगड़ी लाईफ स्टाईल आज तमाम रोगों की जड़ है। वर्तमान जीवन शैली से हमने समय से पहले ही अपने उपर बुढ़ावे के ओढ़ लिया है। लोग समय से पहले ही बुढ़े होने लगे हैं। लोगों का एनर्जी लेवर लगातार कम हो रहा है। डा0 सक्सेना ने कहा कि जिंदगी में खुश रहना सबसे ज्यादा जरूरी हैं। इनसान खुश तभी रह सकता है जब बिमारियों से मुक्त हो। उन्होनें बताया कि नेचुरोपैथी के माध्यम से उन्होने 90 प्रतिशत स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान थैरेपी के जरिये करने के तरीके ढूंढे हैं। इनका प्रयोग करके शरीर को स्वस्थ और निरोग बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे शरीर में लगातार टॉक्सिंस जमा होते रहते है जिससे शरीर के अंग सही ढंग से काम नहीं कर पाते और हम बिमारियों से घिर जाते हैं। अगर इन टॉक्सिन्स को समय समय पर बाहर निकाल दिया जाये तो लगभग 90 प्रतिशत स्वास्थ्य समसस्याओं का इलाज हो जाता है। शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की ये प्रक्रिया क्लीजिंग थैरेपी है। क्लीजिंग थैरेपी से शरीर के अंदरूनी अंगों की सफाई की जाती है। थरेपी में किसी तरह के परहेज की जरूरत नहीं। आप सब कुछ खा पी सकते हैं और जिंदगी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि क्लीजिंग थैरेपी के नुस्खों को उन्होनें पहले खुद पर और अपने परिवार के सदस्यों पर आजाया। और इसके चमत्कारी परिणाम देखने को मिले। जिसके बाद अब वह थैरेपी को जन जन तक पहुंचाने के अभियान में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि लीवर क्लीजिंग थैरेपी में ऑलिव ऑयल और एप्सम सॉल्ट के प्रयोग से लीवर और गॉल ब्लेडर की सफाई की जाती है इससे हार्ट अटैक नहीं आता एलर्जी से छुटकारा मिलता है और गॉल ब्लैडर के स्टोर बिना चीर फाड़ के बाहर निकल जाते हैं और रोधक क्षमता बढ़ती है। इसी तरह डिनी क्लीजिंग में भुट्टे के बाल का काढ़ा बनाकर पीने से किडनी को साफ किया जाता है। इसके अलावा पर्सली की ताजी पत्तियों एवं तरबूज के बीच का भी काढ़ा बनाकर किडनी साफ की जा सकती है। कार्यशाला में कृष्ण नारायण सक्सेना, सुनील वैधा, फातिमा शेख, ज्योति, अनिल राजपूत, प्रदीप बंसल, अशोक सिंघल, हरनाम चैधरी, शिव कुमार बंसल, ललित मिगलानी, राजकुमार अरोरा, हरीश जल्होत्रा, भरत शाह, विजय भूषण गर्ग, राजकुमार फुटेला, गौतम कथूरिया, हरीश बांगा, विष्णु सक्सेना, संजीव छाबड़ा, भारत भूषण चुघ, संजीव खन्ना, सीमा अरोरा, नीति सिंघल, एकता बंसल, सुषमा घई आदि समेत तमाम लोग मौजूद थे।

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