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क्लीजिंग थेरेपी से जीवन बनेगा खुशहालःडॉ. सक्सेना

रूद्रपुर। बढ़ता प्रदूषण, पेरासाईट व असंतुलित जीवन शैली बीमारियों की देन है। जिसके चलते शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं। यदि इन टॉक्सिन्स  को शरीर से बाहर निकाला जाये तो 90प्रतिशत स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का इलाज सम्भव है। शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की प्रक्रिया ही क्लीजिंग थेरेपी है। यह बात नेचुरोपैथी के पीएचडी डॉ. पीयूष सक्सेना ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इस थेरेपी में प्रतिदिन इस्तेमाल की जाने वाली चीजों के कभी-कभी सेवन से शरीर के अंदरूनी अंगों की सफाई की जाती है। थेरेपी में किसी तरह के परहेज की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने बताया कि क्लीजिंग थेरेपी के नुस्खों को उन्होंने पहले खुद पर आजमाया और इसके चमत्कारी परिणाम देखने के पश्चात उसे परिजनों व परिचितों पर आजमाया और धीरे-धीरे थेरेपी आगे बढ़ती गयी। उन्होंने बताया कि शरीर के दो महत्वपूर्ण अंग किडनी व लीवर यदि स्वस्थ हों तो शरीर दुरूस्त रहता है। इसलिये समय-समय पर लीवर की सफाई कराना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने बताया कि किडनी में गड़बड़ी होने से अक्सर शरीर में दर्द, यूरिन में ब्लड आना, स्त्री रोग होना, घबराहट, ब्लड प्रेशर कम या ज्यादा होना आदि बीमारियां आती हैं। उन्होंने बताया कि किडनी की क्लीजिंग करनेसे किडनी स्टोन से छुटकारा मिलता है। वहीं ब्लड में हिमोग्लोबिंग का स्तर भी बढ़ जाता है। डॉ. सक्सेना ने बताया कि इसके साथ ही ब्लड, बॉडी और किडनी से जमा टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकल जाता है और मनुष्य खुद को स्वस्थ महसूस करने लगता है। उन्होंने बताया कि लीवर शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। जिसका प्रमुख कार्य पित्त का निर्माण करना है। लीवर में खराबी आने से गॉल ब्लैडर में पथरी का बनना, पेट में गैस बनना, एलर्जी होना आदि बीमारियां सामने आती हैं। लीवर की क्लीजिंग थेरेपी करने से जहरीले पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। आर्टरी साफ हो जाने से हार्ड अटैक का खतरा भी दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक लाखों लोग इस थेरेपी का लाभ उठा चुके हैं। कल 20 अप्रैल सायं 4 से 6 बजे तक सिटी क्लब हॉल में निःशुल्क स्वास्थ्य सेमीनार का आयोजन होगा। वार्ता के दौरान अशोक सिंघल, प्रदीप बंसल, राजकुमार अरोरा, शिवकुमार बंसल, ललित मिगलानी, भरत शाह, ज्योति राने, फातिमा शेख, अनिल राजपूत व सुनील वैद्य आदि मौजूद थे।

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