February 14, 2026

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मशहूर लोक गायक हीरा सिंह राणा का निधन

उत्तरांचल दर्पण संवाददाता
अल्मोड़ा। रंगीली बिंदी घाघरी काई, ओ धोती लाल किनार वाली…मेरी मानिला डानी हम तेरी बलाई ल्यूला..,आजकल हैरे ज्वाना मेरी नौली पराणा..जैसे लोकप्रिय गीत देने वाले प्रदेश के मशहूर जनगीतकार और लोक कवि हीरा सिंह राणा का निधन हो गया है। वह 78 वर्ष के थे। मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के मानिला निवासी हीरा सिंह राणा ने शनिवार तड़के दिल्ली में अपने आवास पर आखिरी सांस ली। मशहूर लोक गायक हीरा सिंह राणा उत्तराखंड के गिनेचुने कलाकारों में शरीक थे। हीरा सिंह राणा के गीतों में लोक संस्कृति रची बसी होती थी। वह अपनी गायकी के गजब के फनकार थे। उनके गीतों में लोक की महक उठती थी। उनके निधन के साथ उत्तराखंडी लोक संस्कृति के युग का अंत हो गया। हिरदा कुमाऊंनी के नाम से भी पुकारे जाने वाले हीरा सिंह राणा का जन्म 16 सितंबर 1942 को उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के ग्राम-मानिला डंढ़ोली, जिला अल्मोड़ा में हुआ। उनकी माता स्व नारंगी देवी और पिता स्व मोहन सिंह थे। प्राथमिक शिक्षा मानिला से ही हासिल करने के बाद वे दिल्ली में नौकरी करने लगे। नौकरी में मन नहीं रमा तो संगीत की स्कालरशिप लेकर कलकत्ता पहुंचे और आजन्म कुमाऊंनी संगीत की सेवा करते रहे। वह 15 साल की उम्र से ही विभिन्न मंचों पर गाने लगे थे। कैसेट संगीत के युग में हीरा सिंह राणा के कुमाउंनी लोक गीतों के एलबम रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी, सौमनो की चोरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला, आहा रे जमाना जबर्दस्त हिट रहे।राणा को ठेठ पहाड़ी विम्बों-प्रतीकों वाले गीतों के लिए जाना जाता है। वह लम्बे समय से अस्वस्थ होने के बावजूद कुमाऊंनी लोकसंगीत की बेहतरी के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे। उनके निधन से उत्तराखंड के लोकसंस्कृति, कला जगत में शोक छा गया है। लोक कलाकारों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। हीरा सिंह राणा पिछले वर्ष ही मनिला के समीप स्थित पैतृक गांव डढोली पहुंचे थे। हीरा सिंह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। संगीत से गहरा लगाव रखने के कारण हीरा सिंह राणा का विवाह बहुत देर में हुआ। पारिवारिक सदस्यों और शुभचिंतकों के बार बार आग्रह के बाद उन्होंने लगभग 52 वर्ष की उम्र में विवाह किया। वर्तमान में उनकी पत्नी विमला राणा व एक पुत्र है। हीरा सिंह राणा को अपनी जन्मभूमि से विशेष लगाव था। संगीत की दुनिया से थोड़ी फुर्सत मिलने पर वे अपने गांव आ जाते थे। गांव और क्षेत्र के लोगों से मिलते । पिछले वर्ष कूल्हे की चोट के बाद भी वह मानिला आये थे। मिलनसार व्यक्तित्व के धनी राणा लोगों से मिलकर बेहद खुश होते थे।

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