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सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
उत्तरांचल दर्पण सहयोगी
नैनीताल। पूर्व मुख्यमंत्रियों को किराये में छूट मामले में हाईकोर्ट ने सरकार और पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार भाव से किराया देना होगा। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकार के अधिनियम को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया है।कोर्ट ने कहा है कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 का भी उल्लंघन करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाओं का बकाया बाजार दर भुगतान करना होगा। सरकार को इसके लिए कार्रवाई करनी होगी। पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में दी गई सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने के लिए के लिए भी सरकार को उत्तरदायी बनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। जिसे आज सुनाया गया है। देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा पूर्व मुख्यमंत्रीयो के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने में राज्य सरकार ने छूट दे दी गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ बकाया है। इसके अलावा किराया करीब पौने तीन करोड़ है। जिसकी कोर्ट ने छह माह में वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले साल दिए आदेश में दिए थे। पिछले दिनों त्रिवेंद्र सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को भविष्य में दी जाने वाली सुविधाओं से हाथ पीछे खींच लिए। हालांकि उन पर जो बकाया शेष था, वह भी माफ कर दिया जाएगा। रूलक सामाजिक संस्था के चेयर पर्सन अवधेश कौशल द्वारा हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ एक जनहित याचिका डाली गई थी, इसमें हाईकोर्ट में इन सुविधाओं पर तत्काल रोक लगाने और पूर्व मुख्यमंत्रियों से अब तक का बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस फैसले के खिलाफ पूर्व सीएम व महारोष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा हाई कोर्ट चले गए थे किंतु हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा। यहां तक कि जब भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दे दी थी कि क्यों ना आपकी संपत्ति की जांच करा ली जाए।

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