February 13, 2026

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देश सत्ता से नहीं संस्कृति और संस्कारों से बना हैः नरेंद्र मोदी

वाराणसी(उद ब्यूरो)। अपने एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जंगमवाड़ी मठ में पूजा-अर्चना की। इस दौरान वहां लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत में राष्ट्र का ये मतलब कभी नहीं रहा कि किसने कहां जीत हासिल की, किसकी कहां हार हुई। हमारे यहां राष्ट्र सत्ता से नहीं, संस्कृति और संस्कारों से सृजित हुआ है, यहां रहने वालों के सामथ्र्य से बना है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, वीरशैव परंपरा वो है, जिसमें वीर शब्द को आध्यात्म से परिभाषित किया गया है। जो विरोध की भावना से ऊपर उठ गया है वही वीरशैव है। यही कारण है कि समाज को बैर, विरोध और विकारों से बाहर निकालने के लिए वीरशैव परंपरा का सदैव आग्रह रहा है। भारत के पुरातन ज्ञान और दर्शन के सागर श्री सिद्धांत शिखामणि को 21वीं सदी का रूप देने के लिए मैं विशेष रूप से आपका अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा, भक्ति से मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले इस दर्शन को भावी पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। एक ।चच के माध्यम से इस पवित्र ज्ञानग्रंथ का डिजिटलीकरण युवा पीढ़ी के जुड़ाव को और बल देगा, उनके जीवन की प्रेरणा बनेगा। जंगमवाड़ी मठ भावात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से वंचित साथियों के लिए प्रेरणा का माध्यम है। संस्कृत भाषा और दूसरी भारतीय भाषाओं को ज्ञान का माध्यम बनाते हुए, टेक्नाॅलाॅजी का समावेश आप कर रहे हैं, वो भी अद्भुत हैसरकार का भी यही प्रयास है कि संस्कृत सहित सभी भारतीय भाषाओं का विस्तार हो, युवा पीढ़ी को इसका लाभ हो। जंगमवाड़ी मठ भावात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से वंचित साथियों के लिए प्रेरणा का माध्यम है। संस्कृत भाषा और दूसरी भारतीय भाषाओं को ज्ञान का माध्यम बनाते हुए, टेक्नाॅलाॅजी का समावेश आप कर रहे हैं, वो भी अद्भुत है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा संतों के आशीर्वाद से ही उनकी सरकार ने तमाम पुराने विवादों को सुलझाया है। इसी में अयोध्या में राम मंदिर का भी मुद्दा अब सुलझ गया है। सरकार ने राम मन्दिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन कर दिया है। अब जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा, उन्होंने कहा, मठों द्वारा दिखाए रास्ते पर चलते हुए, संतों द्वारा दिखाए रास्ते पर चलते हुए, हमें अपने जीवन के संकल्प पूरे करने हैं और राष्ट्र निर्माण में भी अपना पूरा सहयोग करते चलना है। देश सिर्फ सरकार से नहीं बनता बल्कि एक-एक नागरिक के संस्कार से बनता है। नागरिक के संस्कार को उसकी कर्तव्य भावना श्रेष्ठ बनाती है। एक नागरिक के रूप में हमारा आचरण ही भारत के भविष्य को तय करेगा, नए भारत की दिशा तय करेगा।

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