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उत्तराखंड में वैक्सीनेशन ठप्प: कोविड कर्फयू में छूट दे सकती है सरकार,व्यापारियों ने बनाई रणनीति

देहरादून/रूद्रपुर। कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की रोकथाम के लिए उत्तराखंड में लागू कोविड कर्फयू की अवधि बढ़ाने के साथ ही कोविड वैक्सीनेशन ठप होने को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष जहां राज्य सरकार पर वैक्सीन की आपूर्ती करने विफल रहने का आरोप लगा रहा है वहीं युवा वर्ग भी वैक्सीनेशन की उम्मीद में अपनी बारी का इंतजार कर रहे है। प्रदेश में 18 से अधिक आयु के लोगों के लिए वैक्सीन खत्म होने से टीकाकरण का कार्य बंद पड़ा है। हालांकि 45 से अधिक आयु वर्ग के लिए वैक्सीन होने से उन्हें टीके लगाए जा रहे हैं। अब तीसरे चरण के कफ्र्यू की अवधि मंगलवार एक जून को खत्म हो रही है। उत्तराखंड सरकार के प्रवत्तफा एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में कोविड की स्थिति की समीक्षा कर कर्फयू के संबंध में सोमवार तक निर्णय लिया जाएगा। राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए 10 मई को दोपहर एक बजे से 18 मई तक प्रथम चरण का कोविड कफ्र्यू लागू किया गया था। द्वितीय चरण में इसकी अवधि 25 मई सुबह छह बजे तक बढ़ाई गई, जबकि तृतीय चरण में इसे एक जून सुबह छह बजे तक बढ़ाया गया। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफी कमी आई है। इस बीच सरकार के कुछ मंत्रियों के अलावा व्यापारी वर्ग की ओर से कफ्र्यू में ढील देने पर जोर दिया जा रहा है। व्यापारियों व दुकानदारों ने सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड नियमों के तहत व्यापारिक गतिविधियों का शुरू करने की रणनीति बनाने का दावा किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि चतुर्थ चरण के कोविड कफ्र्यू के दौरान अब दुकानें खोलने और इनके खुलने का समय बढ़ाने जैसी रियायत दी जा सकती है। देश के अन्य राज्यों में भी कोरोना संक्रमण की धीमी रफ्तार को देखते हुए पिछले एक माह से बंद दुकानो को खोलने की छूट देने से आर्थिक गतिविधियों का संचालन शुरू किया जा रहा है। वहीं प्रदेश में सरकारी मदिरा की दुकानों यातायात व्यवस्था बहाल करने से यात्रियों पर अधिक किराये का बोझ कम होगा। शराब और बाजार की दुकाने भी पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। जिससे व्यापारियों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान होने का अनुमान है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रे में भी छोटे व्यापारियों ने दुकान खोलने की पैरवी की है। शहरी क्षेत्रे में रोजगार के लिये गये श्रमिको के साथ ही किरायेदार परिवारों को भी राहत सामग्री देने की जरूरत है। वहीं यातायात ठप होने से चालकों व परिचालकों के समक्ष कोरोनाकाल में रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। बस मालिकों पर रोड टैक्स व बीमा भरने की समस्या आने लगी है। बसों में सवारियों की पचास प्रतिशत यात्री क्षमता पर भी वही पुराना किराया लिए जाने की व्यवस्था से बस संचालक नाराज हैं। बसों में 50 फीसद यात्री क्षमता के साथ भी यात्रियों से पुराना किराया लिए जाने की व्यवस्था के विरोध में बस संचालकों ने 2 मई से बसों का संचालन ठप कर दिया था। इस व्यवस्था के विरोध में केमू की हड़ताल लगातार 28 वें दिन भी जारी रही। इससे यात्रियों को काफी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। रोडवेज की कई मार्गाे में बसें संचालित नहीं होने से उन्हें काफी इंतजार के बाद महंगा किराया देकर निजी टैक्सियों में रवाना होना पड़ रहा है। जिसकी वजह से यात्रियों में काफी रोष पैदा हो रहा है। यात्रियों का कहना है कि सरकार यात्रियों की समस्या पर भी विचार कर यातायात व्यवस्था को बहाल करना चाहिये।

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